शिवत्व की यात्रा : मौन का प्रकाश
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– कभी-कभी जीवन के सबसे छोटे अनुभव और अनकहे शब्द, हमें इतनी गहरी सीख दे जाते हैं कि वह ताजिंदगी हमारे साथ चलती है। यही कहानी है एक गाँव की, जहाँ एक […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– प्राचीन काल की बात है। एक सुंदर, हरे-भरे राज्य में एक साधारण-सा मनुष्य रहता था, जिसका नाम था धर्मवीर। उसका न कोई बड़ा घर था, न भारी धन-दौलत। पर पूरे […]
कई वर्षों पहले पीपल के वृक्ष के नीचे चबूतरे पर टोली बनाकर गुड्डा-गुड़ियों का विवाह करना जैसे; आदि खेल समूह में मिट्टी के बर्तनों के साथ खेलते हुए जाने कब जवानी की दहलीज पर आ […]
“वह हँसती नहीँ, हँसी पीती है। मेरी दार्शनिकता से उत्पन्न उसकी अन्तः हँसी मुझ पर प्रभावी होने लगी। विगत पूरे वर्ष का अंश तो वही है। मुझे रास आने लगा। हम प्राय: अपने निशि-दिवा के […]
ज्यादातर छात्र चाहते हैं कि वह अपने शिक्षकों की ‘गुड बुक’ में रहें। गुरु जी उसे पहचाने, हर काम के लिए उसे याद करें। रजिस्टर लेकर आने को कहें, किताब/कापियां स्टाफ रूम में रखने को […]
Aditya Tripathi (Asst. Teacher, Hardoi)– Once upon a time in the small kingdom of Ramgarh, nestled in the heart of India, lived a courageous and determined queen named Avantibai Lodhi. Avantibai was not just a […]
Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Hardoi) The young man named Peeyush stood in front of the crowd, his heart pounding in his chest. He had been practicing his speech for weeks, but now that the moment […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Rana Punja Bhil, a name etched in the annals of history, was not just a warrior but a symbol of unwavering courage and determination. Hailing from the Bhil tribe of Mewar, he […]
शादी की बहुत दिनों बाद अनोखी अपने ननिहाल गई, वहाँ उसने देखा नानी का घर कच्चे मकान के स्थान पर, पक्की ईंटों का आलीशान बँगला बन गया था। गाड़ी दरवाज़े पर जाकर खड़ी हुई, अनोखी […]
Prisha, a girl with mellifluous voice and cheerful personality believes that one could create his/her own world. Her peculiar ways of looking at life is her individuality. She believes that one should enjoy little things […]
कल की ही बात ( 20 नवंबर, 2022) है, मैं अपने ही शहर में अपनी बेटी को पुलिस लाइंस के पास कोचिंग छोड़ने गई थी। तब मैंने सोचा! स्कूटी में तेल नहीं है, चलो पास […]
मेरा नाम दिशा है, मैं नौवीं कक्षा में पढ़ती हूं। मेरी एक सहेली थी जिसका नाम पायल था। जो मेरे साथ पहली से आठवीं तक पढ़ती थी। अब मैं नौवीं कक्षा में प्रवेश कर चुकी […]
उसने कहा कि मेरे सिवा उसका कोई अपना नहीं है हमने कहा अच्छा , और हां सुनो मुझे न तुम्हारे सारे दुख बाटने है हमने कहा अच्छा , मुझे तुम्हारी स्माइल, तुम्हारी आंखें, गाल पर […]
“लकीर की फ़कीर हूँ मैं, उसका कोई गम नहीं। नहीं धन तो क्या हुआ, इज्ज़त तो मेरी कम नहीं!” यह पंक्तियां हैं सिंधुताई की, जो जीता- जागता प्रमाण हैं जीवन की मुश्किलों से लड़कर हजारों […]
पायल रॉय, संस्थापक – “शिक्षा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर” (युवा समाजसेविका, जबलपुर, म. प्र.) शाम का समय हो चला था। आज बादल कुछ ज्यादा ही साफ दिखाई दे रहे थे और हमेशा की तरह मैं […]
महेन्द्र महर्षि (सेवा निवृत्त; वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी) गुरूग्राम : बुद्ध प्रकाश का सपना अभी और आगे भी चलता , मगर ऐसा नहीं होता कि सपनों का संसार वास्तव में साकार होता ही हो। सुबह की […]
एडवोकेट तृषा द्विवेदी ‘मेघ’, साहित्यसेविका, उन्नाव- इंगेजमेंट हो जाने के बाद देवेश और देविका दोनों एक -दूसरे से मिलने-जुलने लगे थे । दोनों ही समान गुणवान व योग्य थे, देवेश बी0 एड0 करके गवर्नमेंट टीचर की […]
आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश आज , इक्कीस तारीख है । पूरा एक साल बीत गया , अपनी जिंदगी को अपनी तरह जीने की ख्वाईश भीतर ही भीतर दबी पड़ी थी । इन ख्वाइशों ने […]
पाली (हरदोई)- नगर के प्रतिष्ठित मन्दिर माता पँथवारी देवी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर पण्डित शिवशरण अग्निहोत्री ने भगवान श्री राम और भाई भरत के बीच में प्रेम पसंग का […]
नीना अन्दोत्रा पठानिया- चलो उर्मी तैयार हो जाओ , मार्किट जाना है कुछ सामान लाने वाला है। ग़ज़लें सुन रही उर्मी को उसकी सास नीलम ने कहा । चलते है माँ बस एक लास्ट सुनने […]
महेन्द्र महर्षि , 31.7.2018. गुरूग्राम- चारपाई पर लेटा बुद्ध प्रकाश , जिसे घर पड़ौस के लोग लाड़ में बुधवा कहकर बुलाते हैं , आसमान में चमकते तारों को देखता – देखता न जाने कब सो […]
-पहले प्यार का इजहार कर साथ जीने मरने की खाई कसम । -प्रेमिका हुई गर्भवती तो छोड़कर भागा प्रेमी । -प्रेमी से ठुकराई प्रेमिका पहुंची एएसपी के पास । -दगेबाज प्रेमी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज […]
बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’ बेनीगंज गाँव में रामदयाल नाम का एक युवक रहता था। उसके परिवार (फैमिली) में माता-पिता और दो छोटी बहनें थीं। पाँच बीघे खेती योग्य जमीन है। समीप […]
एक एसडीएम की कहानी आज स्कूल में शहर की महिला SDM आने वाली थी क्लास की सारी लड़कियां ख़ुशी के मारे फूली नहीं समां रही थी …सबकी बातों में सिर्फ एक ही बात थी SDM […]
कानपुर देहात के नए पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी कंधे पर बैग लटकाये ,नए जमाने के लड़को की तरह बस मे बैठकर चार्ज लेने पहुंच गए । है न फिल्मी बात । आगे बताते हैं। अपने […]
प्रभात सिंह- 1923 से “कलावती गट्टा” कन्नौज के मशहूर गट्टे का पर्याय बना हुआ है। यूँ तो कन्नौज अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। कन्नौज की धरती पर प्रौढ़ होकर इत्र/इतर/अतर /खुशबू/सेंट/फ्रैगरेंस देश दुनिया के […]
नीना अन्दोत्रा पठानिया- रोज की तरह अंजली ऑफिस से आकर घर के काम निपटा कर जैसे ही रूम आई तो देखा अशोक सो गया था। अंजली अशोक को सोता हुआ देख कर सोचने लग गई, […]
नीना अन्दोत्रा पठानिया (कहानीकार)- “माँ-माँ आज हमारे मुहल्ले में इतनी ज्यादा भीड़ क्यों लगी हुई है , बारह वर्षीय नेहा ने उत्सुकता से अपनी माँ से पूछा । माँ ने कहा “बेटा आज हमारे नेता […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- मेरा गांव मेरा देश मेरा ये वतन , तुझपे निसार है मेरा तन मेरा मन । आदित्य कुछ सोचते हुए कहता है कि ऐसा ही होता है गांव ? जहाँ हर […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- उत्तरप्रदेश के मुख्य मन्त्री को चाहिए कि वे बुन्देलखण्ड के उन क्षेत्रों का दौरा करें, जहाँ के लोग ‘घास की रोटियाँ’ खाते हैं; ज़मीन खोदकर पानी निकालते और पीते हैं; वहाँ […]