आवर्त्तन और दरार

October 18, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट मे, भाँति-भाँति-तस्वीर।राँझा बिकते हैँ कहीँ, कहीँ बिक रहीँ हीर।।दो–धर्म-पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे मे कैसे भला, गले मिलेगी प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर रोग।सत्ता-धर्म गले मिलेँ, […]

धूप-दर्शन

April 5, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–पुरवइया हलकान है, पछुआ करे न बात।घूँघट दिखती साँझ है, सूरज मारे लात।।दो–लू चलती ज्यों आग है, आँख उठे यों पीर।ऋतु कोलाहल यों पड़े, दहक रहा ज्यों तीर।तीन–मन तो बहुत […]