ख़ुद लिखो, खुद पढ़ो और आत्ममुग्ध बने रहो
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रुपये फेँके जा रहे हैँ; बहुसंख्यजन अपनी आजीविकावृत्ति (पेंशन) के रुपये कुकुरमुत्ते-से उगे प्रकाशकोँ की जेब मे डालते आ रहे हैँ और पाण्डुलिपियाँ ‘पुस्तक’ के रूप मे सार्वजनिक होती आ […]