कहानी ढोंगी बाबा का पार्ट 4 : रूहानी फकीर बाबा
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रघुवीर ने काँपते हुए जमील की ओर देखा। “इसका मतलब?” जमील ने मजार की तरफ देखा। “मतलब यह कि शरीफ फकीर कभी था ही नहीं।” उसी समय गाँव के दूसरी तरफ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रघुवीर ने काँपते हुए जमील की ओर देखा। “इसका मतलब?” जमील ने मजार की तरफ देखा। “मतलब यह कि शरीफ फकीर कभी था ही नहीं।” उसी समय गाँव के दूसरी तरफ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अगली सुबह कल्लूपुर में एक और खबर फैली। गाँव के मास्टर रघुवीर की बेटी नीलम रात से गायब थी। रघुवीर के घर में कोहराम मचा था। नीलम उन्नीस साल की थी। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरीफ ने मजार के पीछे की टूटी-फूटी कोठरी को अपना ठिकाना बना लिया था। दिन में वह वहाँ कम ही रहता। शाम ढलते ही उसका असली समय शुरू होता। लोग आते। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– कल्लूपुर गाँव में शाम जल्दी उतरती थी। सूरज डूबने से बहुत पहले खेतों की पगडंडियाँ सुनसान होने लगतीं, बैलों की घंटियाँ दूर कहीं बजतीं और घरों के दरवाजे एक-एक करके बंद […]