आठवेँ और अन्तिम अष्टनायक तीर्थराज प्रयाग की अनिर्वचनीय गौरवगाथा

February 27, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक कथा है, जिसके आधार पर तीर्थराजप्रयाग को तीर्थोँ मे शीर्ष स्थान दिया गया है। वह कथा इसप्रकार है :–एक बार की बात है। ब्रह्मा ने सोचा कि पृथ्वीलोक मे […]

पापबुद्धि को ‘पुण्यबुद्धि’ की ओर ले जाता ‘तीर्थ’

January 15, 2025 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। हम जैसाकि जानते हैँ– तीर्थोँ का राजा प्रयाग कहलाता है, जिसके सहयोगी तीर्थ हैँ :– उज्जैन, हरिद्वार तथा नासिक, जहाँ कुम्भपर्व का आयोजन होता है।अब प्रश्न है, वास्तव […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– तीन

January 14, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• संक्रान्ति का अर्थ है, ‘एक स्थान से दूजे स्थान मे पहुँचना वा एक-दूसरे का मिलना ‘संक्रान्ति’ कहलाती है। ‘संक्रान्ति’ की व्युत्पत्ति पर विचार करेँ तो ज्ञात होता […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– दो

January 13, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो प्रयागराज मे एक ऐसा उत्साह है; उमंग है तथा चहल-पहल है, जो अनिर्वचनीय है। जिज्ञासा, कुतूहल एवं उत्सुकता बाँधे नहीँ बँधती। एक प्रकार से आस्था […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– एक

January 12, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। तीर्थोँ का राजा प्रयागराज पलक-पाँवड़े बिछाये, देश-देशान्तर से आस्था, श्रद्धा, विश्वास एवं भक्ति का भाव लेकर आनेवाले समस्त तीर्थयात्रियोँ के स्वागत मे प्रतीक्षारत है। यह वही प्रयाग […]