तीन साल से लापता एक घर का वारिस फिर भी मौन है मानवाधिकार संगठन

-मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर पीड़ित परिवार ने उठाये सवाल


               हरदोई- दोस्तों द्धारा घर से बुलाकर ले जाये गए एक युवक का तीन साल से कोई अता पता नही है, पीड़ित परिवार पिछले तीन सालों से लापता बेटे को खोजने के लिए पुलिस से लेकर शासन प्रशासन के जिम्मेदारों से न्याय की गुहार लगा रहा है लेकिन उसके लापता बेटे का आजतक कोई सुराग नही लगा है।
             बतातें चलें कि अब्दुलपुरवा निवासी मुबीन अहमद के 22 वर्षीय पुत्र आमिर खां को उसके तीन दोस्त मोमिनाबाद निवासी नूर आलम पुत्र निसार, राहुल श्रीवास्तव पुत्र रमाकांत निवासी लक्ष्मीपुरवा व आरिफ पुत्र मुन्ने निवासी अब्दुलपुरवा घर से बुला ले गए थे तब से आमिर का कोई पता नही लगा है। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसके बेटे को इन्ही तीनों दोस्तोँ ने गायब किया है और उन्हें शक है कि इन तीनों ने ही उसके साथ कोई अप्रिय घटना को अंजाम दिया है। पिता का आरोप है कि आमिर के यह तीनों दोस्त उसके साथ राशनकार्ड छपाई का काम करते थे जिसके बकाए की रकम वह आमिर को वापस नही करना चाहते थे इसलिए इन तीनों आरोपित दोस्तों ने आमिर को घर से बुलाकर गायब कर दिया।
           तीन सालों से लापता आमिर की खोजबीन के लिए संघर्ष कर रहे परिवार को आरोपियों को प्राप्त राजनैतिक संरक्षण के कारण पुलिस से तो कोई सहयोग प्राप्त नही ही हो रहा है इसके साथ साथ जिले में मानवाधिकारों की सुरक्षा का ढिंढोरा पीटने वाले मानवाधिकार संगठनों से कोई मदद भी आजतक नही मिली है। ऐसा भी नही है कि तीन सालों से लापता आमिर की जानकारी मानवाधिकार संगठनों के जिम्मेदारों को नही है लेकिन फिर भी मानवाधिकार संगठन हाँथ पर हाँथ रखकर पूरे मामले में तमाशबीन बने हुए हैं और इतना ही नही जिले के काम करने वाले कई मानवाधिकार संगठनों के जिम्मेदारों ने आजतक पीड़ित परिवार से एक बार मुलाकात तक करना गंवारा नही समझा है। मानवाधिकार संगठनों के द्धारा मामले पर साधी जा रही चुप्पी से पीड़ित परिवार में आक्रोश है और परिवार मानवाधिकार संगठनों के जिम्मेदारों से भी अब कोई उम्मीद नही रखे है।
         लापता आमिर के बड़े भाई मतीन अहमद ने बताया कि उन्होंने स्थानीय सांसद, विधायक, डीएम, एसपी, आईजी, डीआईजी, डीजीपी से लेकर सीएम योगी तक से न्याय की गुहार लगाई लेकिन उनके परिवार को न्याय नही मिला है। मतीन ने बताया कि आमिर के लापता होनेके बाद उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा की बात करने वाले कई संगठनों को पत्र लिखकर मदद करने की गुहार लगाई लेकिन आजतक किसी भी मानवाधिकार संगठन ने उनके परिवार की किसी प्रकार से कोई सहायता नही की और ना ही स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन पर जल्द मामले के खुलासे के दबाब बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जिले में काम कर रहे लगभग सभी मानवाधिकार संगठनों के जिम्मेदार केवल अधिकारियों की हाँ हुजुरी करने तक ही सीमित होकर रह गए है जो समाज व मानवाधिकार के लिए बेहद बेहद शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि उन्हें नही लगता कि जिले की पुलिस व स्थानीय मानवाधिकार संगठन अब उनके परिवार की मदद करेंगे इसलिए वह जल्द ही कोई बड़ा कदम उठाने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।