● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
चन्दौली जनपद के सय्यद राजा थानाक्षेत्र के मनराजपुर गाँव के एक परिवार का आरोप है कि उसके परिवार की बड़ी बेटी निशा यादव को पुलिसवालों ने इतनी यातना दी कि उसकी मृत्यु हो गयी और दूसरी बेटी गुंजा यादव को मारकर घायल कर दिया गया है। पुलिस पर यह भी आरोप है कि निशा को मार डालने के बाद उसे साड़ी से बाँधकर पंखे पर लटका दिया गया था, जिससे यह साबित हो सके कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है, जबकि पोस्टमॉर्टम-रिपोर्ट के अनुसार, न तो उक्त बेटी की मृत्यु पुलिस-द्वारा मारने-पीटने से हुई थी और न ही फाँसी से। इतना ही नहीं, पुलिस-प्रशासन ने ऐसे मे, प्रश्न है, उस बेटी की मृत्यु कैसे हुई थी? मृतका निशा का विवाह जून-माह मे होनेवाला था। मृतका निशा की घायल बहन गुंजा का कहना है– रविवार (१ मई) को रात्रि मे अचानक ४० पुलिसकर्मी घर मे ज़बरदस्ती घुसे थे, जिनमे से ४ महिला पुलिसकर्मी थीं। उस समय हम दोनो बेटियाँ घर के भीतर निचले तल पर थीं। जैसे ही पुलिस घर के भीतर घुसी, दीदी किसी आशंका को समझते हुए, तीसरे तल पर भागकर कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया गया था। उसके बाद बहन को मारने-पीटने की आवाज़ आयी। वह मुझसे बचाने के लिए चिल्ला रही थी और कुछ समय-बाद उसकी आवाज़ शान्त हो गयी थी। मृतका के परिवारवाले यह भी आरोप लगा रहे हैं कि मृत्यु से पूर्व निशा यादव के साथ पुलिसकर्मियों ने शारीरिक दुष्कर्म भी किये थे। एक विधायक को भी इस पूरी घटना के लिए दोषी माना गया है। ऐसे मे, उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री के लिए इस पूरे प्रकरण का सी० बी० आइ० से परीक्षण कराना एक पारदर्शी क़दम होगा। वैसे भी उत्तरप्रदेश मे हत्या और दुष्कर्म के प्रकरण पर उत्तरप्रदेश-पुलिस- प्रशासन की विफलता की कहानी घर-घर सुनी-सुनायी जा रही है।
फ़िलहाल, एस० एच० ओ० उदयप्रताप सिंह को निलम्बित कर दिया गया है। एस० पी० अग्रवाल अंकुर अग्रवाल गोल-मोल जवाब दे रहा है, जिससे लग रहा है कि वह चन्दौली पुलिसकर्मियों को बचा रहा है। बहरहाल, कथित पुलिस-प्रशासन बुरी तरह से फँस चुका है। यहाँ यह भी प्रश्न है– घटनास्थल पर ४० पुलिसकर्मी थे, फिर एक एस० एच० ओ० को ही निलम्बित क्यों किया गया था? सब-इंस्पेक्टर शमशेर सिंह पर पीड़ित पक्ष ने एक स्वर मे आरोप लगाया है, जबकि उस पर अभी तक कोई काररवाई नहीं की गयी है, क्यों?
उल्लेखनीय है कि चन्दौली के कथित कुख्यात अपराधी कन्हैया यादव ज़िलाबदर था और घर से बाहर था, जिसे पुलिस-प्रशासन जानता था, फिर उक्त अपराधी के घर पुलिसकर्मी बिना अनुमति के कैसे घुस गयी थी?
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ मई, २०२२ ईसवी।)