- पहले पांच साल विकास के पचासों करोड़ पर लगाया ग्रहण फिर चेले के साथ उड़ाई मौज।
- निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच विकास का करोड़ों रूपये डकारने वालों की टपकने लगी लार।
उत्तर प्रदेश मे निकाय चुनाव संभवत: नवंबर मे होंगे। इसके लिए नये निकायों एवं सीमा विस्तार के साथ परिसीमन कराने का फरमान शासन जारी कर चुका है।इस बीच निकायों के विकास की रकम व संसाधनों को अपनी पैतृक जागीर की भांति प्रयोग कर करोड़ों की लूट मचाने वालों के साथ-साथ उनकी पत्तलें चाटने वाले चमचे भी निकाय के मुखिया की कुर्सी हथियाने के लिए अपने-अपने कुकर्मों पर पर्दा डालते हुए लूट के अपने ही हमराहियों की छीछालेदर कराने की कवायद मे लगे हैं।
इसी तरह का एक मामला अझुवा मे देखने को मिल रहा है; जहां पांच साल मे निकाय के विकास कार्यों व नागरिक सुविधाओं के लिए सरकार से प्राप्त पचासों करोड़ रुपये मे सेंधमारी करके मौज उड़ाने और बंगला-गाड़ी, सपरिवार शाही मौजमस्ती करने के बाद पिछली बार निकाय के मुखिया की सीट आरक्षित हो जाने पर उसे बदलवाने के सारे हथकंडे फेल हो जाने पर अपने कार्यकाल मे सात हजार की नौकरी पर रखे अपने ही चेले पर बड़ा दांव खेलते हुए पचासों लाख रुपये पानी की तरह बहाकर जनता को पुन: अपने मोहजाल मे फंसाते हुए अपने मंसूबे मे सफल होने पर तीन साल तक चुनाव पूर्व अपने कंडीडेट से तय समझौते 50-50 की तर्ज पर मौज मारते रहे। लेकिन जब वह चेले के हिस्से से चुनाव का खर्च भी निकाल लिए तो चेले ने भन्नाकर उन्हे दरकिनार कर दिया। अब यहीं से उनकी छटपटाहट शुरू हुई, तो कुछ सभासदों व नामित सभासदों को अपने फेवर मे करके चेले के खिलाफ षड्यंत्र करते हुए उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत करा दी। लेकिन जांच का आदेश होने पर उन्हे अपनी करनी का डर भी सताने लगा कि कहीं वह भी नप गए तो न घर के रहेंगे न घाट के; क्योंकि करोड़ों रुपये के कुछ ऐसे काम हैं जो गुरू जी के समय से चेले के समय तक भी खत्म नही हो सके हैं। ऐसे मे अगर चेला अगर अंदर हो जाये तो गुरू जी का बच पाना नामुमकिन था। अपनी गलती समझ मे आने पर फिर उन्होने युक्ति लगायी और गुरू-चेले मे समझौता हो गया। शातिरों ने सोचा कि किसी तरह मामला निपटाया जाए नही तो दोनो की बनी-बनाई चकाचक सफेदी मलिन होते देर नही लगेगी। दोनो ने मिलकर असरदार लोग से दबाव व प्रलोभन दिलाकर शिकायतकर्ता सभासदों को पुन: अपने पक्ष मे कर लिया। सभासदों की भी बिन मांगी मुराद पूरी हो गई।
हालाकि इसके लिए उनको जेब ढीली कर लाखों रुपये से सभी सभासदों को संतुष्ट करना पड़ा। इधर अब निकाय चुनाव की सुगबुगाहट एवं निकटता के बीच दोनो भ्रष्टाचारी गुरू-चेले एक दूसरे को नीचा दिखाते हुए फिर से नगर के मुखिया की सीट हथियाने के हथकंडे शुरु कर दिए हैं और उधर नगर पंचायत का विकास और नागरिक सुविधाओं की आमद-आपूर्ति चर्चित बाबू के रजिस्टर पर पूर्व की भांति सरपट दौड़ रही है। जिनकी कृपा का प्रसाद पाकर रातों-रात मालामाल होने के तरह -तरह के हथकंडे सीट के लिए अपनाए जाते हैं। इस बार का चुनाव और दिलचस्प होगा। क्योंकि दस साल तक गुरू-चेले का पत्तल चाटने और नगर पंचायत के विकास के कमीशन मे अपना हिस्सा बंटाने वाले चिंदी चोर भी सिंहासन का ख्वाब देख रहे हैं, जो दस साल तक अपने फर्ज को नीलाम कर जनता के शोषण मे संलिप्त रहे।