आज ई-मेल के आविष्कारक भारतीय मूल के वैज्ञानिक का जन्मदिन

.महज़ 14 साल की उम्र में किया था  ई-मेल का आविष्कार

 संकलित-


बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि तेजी से संदेश पहुंचाने इ-मेल टेक्नोलॉजी का आविष्कार एक भारतीय अमेरिकी वी.ए. शिवा अय्यादुरई ने उस समय किया था, जब वह महज़ 14 साल के थे। वीए शिवा अय्यादुरई ई-मेल सिस्टम के आविष्कारक हैं. इनका जन्म : 2 दिसंबर, 1963 मुंबई में हुआ था. मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएट डिग्री, विजुअल स्टडीज में मास्टर डिग्री, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और सिस्टम बायोलॉजी में पीएचडी.
परिवार : (मां) मीनाक्षी अय्यादुरई, (पिता) वी. अय्यादुरई, (बहन) डॉ. उमा वी. अय्यादुरई।
ईमेल जो आज कम्युनिकेशन का सबसे बड़ा ज़रिया बन गया है, उसकी खोज शिवा ने की थी। ईमेल बनाने से लेकर आज तक का शिवा का सफर काफी रोचक रहा है। हम आपको बताने जा रहे हैं ईमेल के आविष्कारक शिवा की कहानी।
शिवा जब सात साल के थे तो वे माता-पिता के साथ अमेरिका चले गए। वे बताते हैं- ईमेल की खोज करने की मेरी यात्रा इसके सात साल बाद शुरू होती है। मैं 1978 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में समर कोर्स में कम्प्यूटर कोड सीख रहा था, लेकिन मेरी दिलचस्पी मेडिसिन में थी। मां मुझे न्यूजर्सी के यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री ले गईं, जहां वह डाटा सिस्टम एनालिस्ट थीं। उन्होंने अपनी कलिग लेस मिशेलसन से मिलवाया और कहा कि मेरे बेटे के लिए कुछ काम हो तो बताएं। लेस अस्पताल के लैब में रिसर्च को ऑटोमेट करने पर काम कर रहे थे। उन्होंने मुझे इस प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया और चुनौती दी कि ऑफिस और ऑर्गनाइजेशन के भीतर पेपर आधारित पारंपरिक कम्युनिकेशन सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम में बदलकर दिखाएं। ढाई साल तक शिवा दिन-रात मेहनत करते रहे और उन्होंने लोकलाइज्ड सर्वर से जुड़े कम्प्यूटरों का उपयोग करते हुए डिजिटल मेलबॉक्स ईजाद किया।
शिवा के द्वारा ईजाद किए गए टूल के जरिए अस्पताल के कर्मचारी एक-दूसरे को इलेक्ट्रॉनिकली मैसेज और अटैचमेंट भेज सकते थे। इस टूल को ईमेल सिस्टम नाम दिया, जो आज पूरी दुनिया में कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण जरिया है।
बाद में उन्होंने इस सिस्टम को एमआईटी में लागू किया। 1981 में उन्हें इस के लिए वेस्टिंगहाउस साइंस अवॉर्ड मिला। उन्होंने 1982 में कॉपीराइट हासिल कर लिया। 1995 में कंपनी इकोमेल शुरू की और वे डॉ. ईमेल कहलाने लगे। शिवा कहते हैं- जब थॉमस अल्वा एडिसन ने लाइट बल्ब की खोज की थी, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन इसे पूरी दुनिया में स्वीकारा जाएगा।
शिवा बताते हैं- ‘मां की कम्प्यूटर साइंस में रुचि के कारण ही मैं ईमेल की खोज कर सका। मुंबई में मां डॉन बॉस्को स्कूल्स के मैथ्स डिपार्टमेंट की हेड थीं। कम्प्यूटर साइंस में भी रुचि ले रही थीं। 1970 में अमेरिका चले गए। उस समय वहां मंदी थी और गणित के टीचरों के लिए जॉब नहीं थी। मां एक टेक्सटाइल मिल में काम करने लगी। साथ ही, एजुकेशनल कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट में कम्प्यूटर साइंस में नाइट कोर्स शुरू किया। इस आधार पर उन्हें यूएनडीएमजे में जॉब मिल गया। उन्होंने मुझे भी कम्प्यूटर साइंस पढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिसकी बदौलत ईमेल सिस्टम खोज सका।