जीरो शैडो-डे या ‘शून्‍य छाया दिवस’

कर्क रेखा के उत्‍तर और मकर रेखा के दक्षिण में शून्‍य छाया दिवस नहीं होता : प्रदीप नारायण मिश्र (पी.बी.आर.विज्ञान क्लब समन्वयक)

प्राय: यह माना जाता है कि परछाई कभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ती पर अमूमन वर्ष में दो बार परछाई कुछ पलों के लिए हमारा पीछा छोड़ देती है। इस दिवस को शून्य परछाई दिवस कहते हैं। आज दिनांक 13.5.2020 को पुणे में शून्य छाया दिवस होने के कारण विज्ञान प्रसार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार) के अन्तर्गत कार्यरत पूरे देश के लगभग 80 सक्रिय विज्ञान क्लबों ने इरेटोस्थीन्स विधि द्वारा पृथ्वी की परिधि मापने हेतु 11 बजे से लेकर 01 बजे तक प्रयोग सम्पन्न किया।

स्थिति का अध्ययन करते शिवम

विज्ञान प्रसार द्वारा गोल्ड श्रेणी में नामित गौसगंज हरदोई के पी.बी.आर.विज्ञान क्लब (VP-UP0151) के समन्वयक पी.एन. मिश्र एवं सदस्यों कु.आकांक्षा मिश्रा व शिवम मिश्र ने भी इस प्रयोग को स्वयं के द्वारा बनाए गये नमूने की छाया मापकर सम्पन्न किया। शीघ्र ही पूरे देश में किए गये प्रयोग के प्रेक्षणों पर आधारित सुखद परिणाम निकल कर आएगा।

मालूम हो कि वर्ष में दो दिन ऐसे होते हैं, जब सूर्य मध्‍याह्न के समय ठीक हमारे सिर के ऊपर चमकता है। इस‍लिए उन दो दिनों में मध्‍याह्न के समय हमारी परछाई हमारा साथ छोड़ देती है। परछाई न बनने के इस घटनाक्रम को खगोल विज्ञानी जीरो शैडो-डे या ‘शून्‍य छाया दिवस’ कहते हैं। ध्‍यान रहे कि शून्‍य छाया दिवस की घटना कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच में ही घटित होती है। कर्क रेखा के उत्‍तर और मकर रेखा के दक्षिण में शून्‍य छाया दिवस नहीं होता है।

कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच सूर्य के दक्षिणायण होते समय इस खगोलीय घटना को देखा जा सकता है। इस समय सूर्य उत्‍तर से दक्षिण की ओर वापस आता है और ठीक दोपहर के बारह बजे भूमध्‍य रेखा से दक्षिण में 23.5 डिग्री अक्षांश पर स्थित मकर रेखा पर शून्‍य परछाई बनती है। दूसरी बार भूमध्‍य रेखा से दक्षिण में 23.5 डिग्री अक्षांश पर स्थित मकर रेखा पर मौजूद कई स्‍थानों पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, तो वहां भी मध्‍याह्न के समय कुछ पलों के लिए शून्‍य छाया की स्थिति बन जाती है। इस तरह कन्‍याकुमारी से कर्क रेखा तक मध्‍य भारत के तमाम स्‍थानों में अप्रैल से जून तक और वापसी में जून से अगस्‍त तक किसी खास दिन मध्‍याह्न में इस खगोलीय घटना को वर्ष में दो बार देखा जा सकता है। आज हुई इस खगोलीय घटना को पी.बी.आर.विज्ञान क्लब समन्वयक प्रदीप नारायण मिश्र ने प्रयोग द्वारा बच्चों को ऑनलाइन माध्यमों के जरिए समझाते हुुुए उसकी तस्वीरें साझा कीं ।