भारतीय लोकतन्त्र के रक्षार्थ सभी विपक्षी दल एक हों

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आगामी लोकसभा-चुनाव मे ‘भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस’ दक्षिण-भारत, पूर्वोत्तर-भारत, पूर्वी भारत, पश्चिम-भारत के कई राज्यों तथा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखण्ड, हिमाचलप्रदेश, महाराष्ट्र आदिक राज्यों मे स्वतन्त्र रूप से चुनाव लड़कर महत्त्वपूर्ण विजय अर्जित कर सकती है। काँग्रेस उत्तरप्रदेश मे अभी बहुत अस्थिर दिख रही है, कारण उसमे संघटनात्मक अभाव है।

‘भारतीय जनता पार्टी’ को ‘अस्पृश्य’ मानकर यदि शेष दल लोकतन्त्र-रक्षार्थ चुनावमैदान मे उतरते हैं और वास्तविक लोकहितकारी योजना को सार्वजनिक करके चुनाव लड़ते हैं तो ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ का बोरिया-बिस्तर बँध सकता है और कथित फ़क़ीर की गरदन मे ‘झोला’ डालकर पंचवर्षीय फ़कीरी करने के लिए किसी दरगाह मे भेजा जा सकता है।

अखिलेश यादव को जातिवादी राजनीति के खोल से बाहर आना होगा। मायावती बिलकुल विश्वसनीय नहीं है; क्योंकि वह ‘कदाचार’ के शिकंजे मे जकड़ी हुई है। ‘भीमवादी’ दल भी ‘जय-जय भीम’ की भाँग अपने लोग को चटा चुका है। अरविन्द केजरीवाल को काँग्रेस से हाथ मिलाना ही पड़ेगा। ममता बनर्जी का रुख़ जो पहले गरम था, कर्नाटक-चुनावपरिणाम आ जाने से अब कुछ-कुछ नरम दिखता आ रहा है। नीतीशकुमार और तेजस्वी यादव ‘कारवाँ’ बनाने के काम को सही ढंग से अंजाम देने की दिशा मे लग चुके हैं।

यहाँ पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे/खरगे को चाहिए कि वे कुछ आवश्यकता से अधिक झुककर अपनी सदाशयता का परिचय दें; क्योंकि जिस लोकतन्त्र की लगातार गरदन मरोड़ी जा रही है, उसके प्रति संवेदनशील होना अपरिहार्य है।

‘भारतीय जनता पार्टी’ की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का खुला विद्रोह करनेवाले सभी राजनैतिक दलों का पुनीत कर्त्तव्य है कि वे सभी एक स्वर मे ‘विपक्षी एकता’ के सूत्र को इस प्रकार सुदृढ़ करते हुए विस्तार करें कि उसमे किसी प्रकार की राष्ट्रघाती ग्रन्थि न लग सके। ऐसा होने पर ही देश की जनता उनका साथ देगी, अन्यथा अपने मताधिकार के प्रति ‘उदासीन’ दिखेगी वा ‘नोटा’ के बटन दबाने के लिए मतदाता बाध्य और विवश होते रहेंगे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ मई, २०२३ ईसवी।)