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प्रियवर विद्यार्थिवृन्द!
सारस्वत पथ पर अग्रसर रहे!
(‘रहें’ और ‘रहें!’ अशुद्ध प्रयोग हैं; क्योंकि यहाँ ‘इच्छासूचक’ वाक्य है।)
हमारे साप्ताहिक (बुद्धवासरीय) स्तम्भ ‘मार्गदर्शन’ के अन्तर्गत आप कल (१६ जून) ‘अमर उजाला उड़ान’ में कुछ हटकर ज्ञान प्राप्त करेंगे। हमारे विद्यार्थी सुदूर अंचलों से अध्ययनार्थ शिक्षण-संस्थानों में जाते हैं; परन्तु अधिकतर वहाँ के वातावरण के प्रति सजग नहीं रह पाते; परिणाम भयावह होता है और जो वहाँ के परिवेश को समझ कर सुमति के साथ अपने अध्यवसाय को गति देते हैं, वे लक्ष्यसंधान कर पाते हैं।
तो आइए! ‘कल’ की प्रतीक्षा करें।