‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से बालदिवस के अवसर पर ‘इलाहाबाद की बालसाहित्य और बालपत्रकारिता’-विषयक एक आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन १४ नवम्बर को अलोपीबाग़, प्रयागराज से किया गया था, जिसमें इलाहाबाद के उन बालसाहित्यकारों और बालपत्रकारों की सहभागिता थी, जो इन दिनों प्रयागराज में हैं और बाहर भी।
इस अवसर पर मेरठ में अध्यापन कर रहीं प्रो० स्वाति नादियाल ने कहा, “इलाहाबाद की बाल-पत्रकारिता अतीव समृद्ध रही है। देश से प्रकाशित हो रही पत्रिकाओं में इलाहाबाद का स्थान सर्वोच्च रहता था। उन दिनों गम्भीर प्रकृति के जानकार साहित्यकार बालसाहित्य से जुड़े हुए थे।”
पटना से डॉ० विनय उपाध्याय ने बताया, “इलाहाबाद में एक-से-बढ़कर-एक बालसाहित्यकार थे। इतना ही नहीं, बड़े साहित्यकार भी बच्चों के लिए लिखा करते थे। श्रीनाथ सिंह, देवेन्द्र तिवारी, मार्कण्डेय, अमरकान्त ने भी बच्चों के लिए लेखन किये थे।”
आयोजक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा, “आज इलाहाबाद की बाल-पत्रकारिता ‘शिखर से शून्य की ओर’ दिख रही है। एक समय था, जब इलाहाबाद से बालदर्पण, शिशु, मदारी, बन्दर, बालसखा, बालमित्र आदिक बड़ी संख्या में पत्रिकाएँ प्रकाशित होती थीं, जिसका अपना स्वर्णिम इतिहास रहा है। दूसरी ओर, जितनी बड़ी संख्या में इलाहाबाद में बालसाहित्य का लेखन किया गया था, उतनी देश के किसी अन्य भाग में नहीं किया गया था। अब न तो वैसे प्रकाशक रह गये हैं और न वैसे लेखक।”
इनके अतिरिक्त इस आयोजन में हिसार से संजना वर्मा, जबलपुर से हिमांशु यादव, कन्नौज से डॉ० रश्मि शाक्या, अलीगढ़ से कंचन विश्वकर्मा आदिक की सक्रिय भागीदारी थी।