‘पढ़ाई नहीं तो फ़ीस नहीं’ विषयक सक्रिय आन्तर्जालिक राष्ट्रीय परिसंवाद ७ अगस्त को

कोरोना ने औसत भारतीय की कमर तोड़ दी है; आर्थिक स्थिति जर्जर हो चुकी है। लाखों लोग की नौकरियाँ छिन चुकी हैं। शिक्षण संस्थानों की ओर से सक्रिय आन्तर्जालिक पढ़ाई कराने की बात की जा रही है। प्रश्न है, कितने बच्चों के पास लैपटॉप, मोबाइल तथा सम्बन्धित अन्य उपकरण हैं? जिनके पास हैं, वे अपने रुपये लगाकर ‘नेट’ की व्यवस्था करते हैं, फिर कितने विद्यार्थी सक्रिय आन्तर्जालिक पद्धति के अन्तर्गत अध्ययन कर पाते हैं? इससे आँखों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। अधिकतर विद्यालय तो सक्रिय आन्तर्जालिक शिक्षित कर रहे अध्यापकों को वेतन नहीं दे रहे हैं; कुछ कटौती करके दे रहे हैं। ऐसे में, माता-पिता और अभिभावकों से शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं है।

इसी सन्दर्भ में आगामी ७ अगस्त को ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से सक्रिय आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया जायेगा, जिसमें कृष्ण नारायण पाठक (बंगलुरु), राजन (दिल्ली), डॉ० सुरेशचन्द्र द्विवेदी, रमाशंकर श्रीवास्तव (प्रयागराज), राजश्री यादव (आगरा), डॉ० प्रदीप चित्रांशी (हैदराबाद), डॉ० अरुण प्रकाश पाण्डेय (दिल्ली) घनश्याम अवस्थी (गोंडा), अशोक पाण्डेय (बलिया) तथा सरिता सिंह परिहार (प्रयागराज) की सहभागिता रहेगी। यह सूचना समारोह-आयोजक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने दी है।