— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
मनु पाण्डेय गिरिफ़्तार आरोपित शशिकान्त पाण्डेय की पत्नी बतायी जा रही है और पुलिस-मुठभेड़ में मारे गये अपराधी प्रेमप्रकाश पाण्डेय की पुत्रवधू। शशिकान्त पाण्डेय मृतक विकास दुबे का ममेरा भाई है। कानपुर में पुलिस-हत्याकाण्ड में कथित महिला की एक कुशल प्रतिनायिका के रूप में भूमिका समूची नारी-जाति को कलंकित करनेवाली है। उस महिला के लगभग दस ‘ऑडियो-वीडियो’ सार्वजनिक हो रहे हैं, जिनसे यह सुस्पष्ट हो जाता है कि मनु पाण्डेय हत्याकाण्ड से पूर्व विकास दुबे और उसके गुण्डों की व्यूहरचना की प्रतिपल-योजना से वाक़िफ़ है; वह घटना के एक-एक क्षण की गवाह है। ऐसा इसलिए कि उक्त रक्तिम घटना में उसका पूरा परिवार शामिल था।
उसके बयानात अब उसके ही गले की हड्डी बन चुके हैं। पहले कुछ कथन करना और कभी अपने ही कथन का पोस्टमॉर्टम कर, एक नया कथन करना और उससे पुलिस भ्रमित करना, अब सामने आ चुका है। मनु अपने मोबाइल पर २ जुलाई की विलम्ब रात्रि में मुठभेड़ से पहले अपने ससुर से कह रही थी, “अरे पापा! जल्दी आओ। विकास भइया ने कहा है कि पुलिस आ रही है; छत पर पहुँचो और गोली चलाओ।” घटना के बाद पुलिस-काररवाई के भय से मनु ने अपने सभी सगे-सम्बन्धियों से उनके मोबाइल से उसके (मनु के) नम्बर को हटाने के लिए बाध्यता के स्वर में कहती रही,”भइया! मेरा हटा दो और सबसे कह दो कि मेरा नम्बर हटा दें।” उसने यह भी कहा था, “मैं सिम चबा चुकी हूँ; मोबाइल को गाड़ने जा रही हूँ।”
मनु पाण्डेय जिस चतुराई के साथ प्रश्नों के उत्तर देती आ रही है, उससे लग चुका है कि वह बेहद शातिर औरत है और निर्दय भी। अब वह अपने ही बनाये जाल में पूरी और बुरी तरह से फँसकर कसमसा रही है।
पुलिस के हाथ में ‘मनु पाण्डेय’ नाम का एक ऐसा साक्ष्य मिल गया है, जिसके आधार पर अब उत्तरप्रदेश-शासन और उसके एस०टी०एफ० के अधिकारी अपने पक्ष में ‘मनचाहा’ खेल खेल सकते हैं। दूसरे शब्दों में, मनु पाण्डेय का हर तरह से ‘इस्तेमाल’ किया जायेगा और मनु पाण्डेय अपने और अपने पति शशिकान्त पाण्डेय को बचाने के लिए ‘इस्तेमाल’ होगी ही; क्योंकि वह अपने ही दुष्चक्र में बुरी तरह से फँसकर फड़फड़ा रही है।
दूसरी ओर, अब पुलिस विकास दुबे के साथियों की पत्नियों के मोबाइल जाँच के लिए अपने अधिकार-क्षेत्र में ले चुकी है। अब यह प्रकरण रहस्य-रोमांच से भरपूर एक दिलचस्प फ़िल्म का रूप ले चुका है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १७ जुलाई, २०२० ईसवी)