‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’-सहित देश का मीडियातन्त्र बेहोश!

———-० ज्वलन्त ०——–

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

गत १३ अक्तूबर और उसके बाद से बांग्लादेश में जिस प्रकार का साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया गया था, उससे कई हिन्दू-परिवारों के प्रति नृशंस हिंसा तथा अमानवीय कृत्य किये गये थे। इसके लिए बांग्लादेश के कट्टरपन्थी संघटन ‘जमात-ए इस्लामी’ को दोषी ठहराया गया है।

बताया जाता है कि गत १३ अक्तूबर को बांग्लादेश के ‘कोमिला’ नामक क्षेत्र में बनाये गये एक दुर्गापाण्डाल में गणेश जी के पाँव के नीचे गहरे हरे रंग का एक क़ुरआन रखा गया था। उसके बाद ‘क़ुरआन का अपमान’ को लेकर साम्प्रदायिक विद्वेष की ऐसी आग उठी कि बड़ी संख्या में हिन्दू-परिवारों की अचल-चल सम्पत्ति दहक कर राख बन गयी थी; हिन्दू-परिवारों की महिलाओं के साथ शारीरिक दुष्कर्म किये गये थे; कई हिन्दू-परिवार के लोग की हत्या की गयी थी और करायी गयी थी। इतना ही नहीं, घरों में घुसकर बहू-बेटियों के साथ शारीरिक दुष्कर्म किये गये थे; हिन्दू-मन्दिर ध्वस्त किये गये थे।

अब सी० टी० टी० ह्वी० से ज्ञात हुआ है कि उक्त प्रकार का साम्प्रदायिक विद्वेष पूर्वनियोजित ढंग से उत्पन्न कराया गया है, जिसमें दुर्गा-पाण्डाल में एक बांग्लादेशी मुसलमान ‘इक़बाल हुसैन’ क़ुरआन को लेकर घुस रहा है और गणेश की मूर्ति के पैरों के पास उसे रखने के बाद लौट रहा है; लौटते समय वह अपराधी हनुमान् की गदा भी अपने साथ लेकर निकल रहा है।
अब उस विधर्मी और कुकर्मी बांग्लादेशी नागरिक को पुलिस ने गिरिफ़्तार कर लिया है। उसने बताया है कि कथित क़ुरआन को सऊदी अरब से फ़ैयाज़ नामक एक व्यक्ति ने लाया था। इस प्रकरण में अब तक ४१ सन्दिग्ध आरोपितों की गिरिफ़्तारी की जा चुकी है।

अब प्रश्न है, स्वयं को हिन्दुओं का मसीहा कहनेवाले भारत के राजनैतिक दल ‘भारतीय जनता पार्टी’ और निरपराध भारतीय मुसलमान जनता पर अत्याचार करनेवाले ‘हिन्दू युवा संघटन’, ‘बजरंग दल’, ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’, ‘विश्व हिन्दू परिषद्’, ‘हिन्दू वाहिनी’ आदिक किस खोह में घुसे हुए हैं? ‘लव जिहाद’ और ‘हिन्दू-मुसलमान’, ‘मन्दिर-मस्जिद’ की कुत्सित-गर्हित राजनीति कर, देश में साम्प्रदायिक सद्भाव को नष्ट कर, आतंक फैलानेवाले, आग लगानेवाले देश के घिनौने चेहरे कहाँ दुबक कर बैठे हुए हैं?

हर घृणित संयोग को लोकतन्त्रीय प्रयोगशाला में प्रयोग कर, अवसर का रूप देनेवाले वज्र बेहया-बेशर्म लोग की जिह्वा कटकर गिर चुकी है। इस संदर्भ में मीडिया के बजबजाते गटर में बेसुध पड़े ‘देश के नामी-गिरामी महिला-पुरुष और अर्द्ध-नारीश्वर-से दिखते संवाददाता, सम्पादक, समाचारवाचक, समाचारलेखक, टी० ह्वी० समाचार-चैनलों पर ‘पूछता है भारत’, ‘टक्कर’, ‘मास्टर स्ट्रोक’, ‘हुंकार’, ‘हम तो पूछेंगे’, ‘महाभारत’, ‘प्राइम टाइम एक्सक्लूसिव’, ‘प्राइम टाइम’, ‘ब्रेकिंग न्यूज़’, ‘सौ बात की एक बात’, ‘सुपर एक्सक्लूसिव’, ‘आर-पार’, ‘डीएनए’, ‘न्यूज़ अपडेट’, ‘ख़ास ख़बर’, ‘ख़बरों की ख़बर’, ‘ललकार’ आदिक जैसे स्तम्भों के ठीकेदार-ठीकेदारिन के सामाचारिक चरित्र पर अमिट प्रश्नचिह्न लग चुके हैं।

देश का प्रधानमन्त्री, विदेशमन्त्री, रक्षामन्त्री, गृहमन्त्री, राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार, देश के सभी विपक्षी दलों के प्रमुख आदिक– ये सभी प्रश्नों के कटघरे में आ चुके हैं।

इतिहास इन सभी को कभी क्षमा नहीं करेगा।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ अक्तूबर, २०२१ ईसवी।)