‘म्लेच्छ-भाषा’ क्या है?
अस्पष्ट भाषा/अपभ्रंश भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ है। जिन वर्णों का उच्चारण व्यक्त न हो, वह ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती है। किरात, खस, बर्बर, पह्लव, पौण्ड्र, द्रविड, शक, शबर, सिंहल, यवन आदिक जातियाँ-जनजातियाँ- बर्बर जातियाँ ‘म्लेच्छ’ कहलाती हैं और उन सभी की भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती है। ऐसा इसलिए कि वे जातियाँ ‘वर्ण-व्यवस्था’ से इतर जातियाँ हैं और उनकी भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ के रूप में रेखांकित होती है। वे लोग अनाचारी, कदाचारी दुराचारी, दुर्दान्त तथा अधम होते थे।
‘शतपथब्राह्मण’ में एक स्थल पर कहा गया है, “ते असुरा आत्त वचसो हे अलवो! हे अलवो! इति।”
अर्थात्– असुरजन हे आर्य! हे आर्य! के स्थान पर ‘हे अलव! हे अलव! कहते थे।
मलेच्छ के समानार्थी शब्द हैं—- ‘मलिच्छ’, ‘मलिक्ष’ तथा ‘मलेक्ष’। यह पुंल्लिंग-शब्द है, जो एक प्रकार के व्यक्ति का सूचक है।
बृहद् जानकारी के लिए ‘मत्स्यपुराण’, ‘विष्णुपुराण’ तथा ‘बृहत्संहिता’ का अनुशीलन किया जा सकता है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ जुलाई, २०२० ईसवी)