अनिल चौधरी (बैंक अधिकारी)
दहेज़ की मंडी में सजी दूल्हों की दुकान देखिए,
नोटों की हवस में लिपटे ये बिकाऊ सामान देखिए ।
खुद ही लगाते हैं यहां ये अपने वजूद की कीमत,
यहाँ सरेआम-खुलेआम बिकते ये इंसान देखिए ।
हर तरह का दूल्हा मिलेगा आप फरमाइए तो सही,
मोल-भाव मुमकिन है जनाब कीमत लगाइए तो सही ।
छोटा-बड़ा हर ओहदे का दूल्हा मौजूद है बाजार में,
इस नीलामी के खेल में हाथ आजमाइए तो सही ।
नीलाम होने को बेताब इन दूल्हों के अरमान देखिए,
यहां सरेआम खुलेआम बिकते ये इंसान देखिए ।
बेटी का जनम सबके लिए खुशियों की सौगात कहाँ,
बाजार में दूल्हे की खरीद हर मां-बाप की औकात कहाँ ।
कैसे खरीदें वह इस मंडी से सस्ता और अच्छा दूल्हा,
इन दुकानदारों में भला लाज कहां जज्बात कहां ।
दहेज की कालिख से कलंकित समाज की शान देखिए,
यहां सरेआम खुलेआम बिकते ये इंसान देखिए ।