माँ ही मेरी जिंदगी और माँ से ही मेरी पहचान है

शिवांकित तिवारी, युवा कवि,लेखक एवं प्रेरक, सतना (म.प्र.)

माँ शब्द मेरी जिंदगी का

सबसे बड़ा गुमान है,
माँ ही मेरी जिंदगी और
माँ से ही मेरी पहचान है।
अंधेरों से उजालों तक के
इस सफर में,
मशाल बनकर मेरी माँ ने
दिया बहुत बड़ा योगदान है।
हर मुसीबत से बचाया मुझे,
जिंदगी जीना सिखाया मुझे,
हर कदम पे संभाला मुझे,
हार कर जीतना सिखाया मुझे।
सब-कुछ दिया बचपन से
जिसकी जिद की,
त्याग दी सारी जरूरतें
और ख्वाहिशें खुद की।
आज जहाँ तक मैं पहुँचा हूँ,
ये मेरी माँ के त्याग का परिणाम है,
मेरी माँ के मेरी जिंदगी में
अनगिनत कर्ज-एहसान है।
मेरी माँ के लिये एक क्या,
ऐसे सौ जनम भी कुर्बान हैं,
इस धरती पर मेरे लिये
मेरी माँ ही सच्चा भगवान है॥