कल (१३ मार्च) रविवार/रविवासर होगा और आप प्रति सप्ताह की भाँति ‘दैनिक जागरण’, ‘नई दुनिया’ तथा ‘नव दुनिया’ के चारपृष्ठीय ‘झंकार’ के द्वितीय पृष्ठ पर ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत हमारी रविवारीय/ रविवासरीय ‘भाषा की पाठशाला’ मे यह ज्ञान प्राप्त करेंगे कि ‘जातिपाति’ सही शब्द है अथवा ‘जातिपाँति’ अथवा ‘ज़ातपाँत’ अथवा ‘जातपात’। आपको यह भी समझाया जायेगा कि ‘परिवेश’ शुद्ध है अथवा ‘परिवेष’ अथवा दोनो ही सार्थक शब्द हैं। आपको ‘नींव’ का प्रयोग करना होगा अथवा ‘नीवँ’ का, इसका भी सकारण ज्ञान कराया जायेगा।
पाठशाला मे जब आपको समझाया जायेगा तब अनुभव होगा कि आपमे से अधिकतर विद्यार्थी अब तक ‘भ्रमजीवी’ के रूप मे अनुपयुक्त शब्द का व्यवहार करते आ रहे हैं।
अब आपको अपनी जिज्ञासा का प्रशमन करने के लिए अपने (यहाँ ‘अपनी’ का प्रयोग अशुद्ध है; क्योंकि उसके साथ ‘अनुसार’ जुड़ा हुआ है, जो पुंल्लिंग का बोधक है।) उपलब्धता और सुविधानुसार उपर्युक्त समाचारपत्रों के कल का अंक क्रय करके अपने शब्दसंबोध का विस्तार करना होगा। उक्त भाषिक स्तम्भ के माध्यम से जो ‘दैनिक जागरण-प्रतिष्ठान’ निरन्तर छ: वर्षों से अपना अनन्य और अभिनव प्रस्तुति करता आ रहा है, उससे हमारे ज्ञानपिपासुजन का सम्यक् शमन होता आ रहा है।
तो आइए! कल (१३ मार्च) की प्रतीक्षा करें।