‘सूर्य’ की चमक से ‘न्यूज़ीलैण्ड’ की आँखें चौंधियाईं!

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

भारत के उदीयमान खिलाड़ियों ने आज (२० नवम्बर) अपना साहसिक प्रदर्शन करते हुए, न्यूज़ीलैण्ड मे ही न्यूज़ीलैण्ड के क्रिकेट-दल को दूसरे टी-20 क्रिकेट मैच मे ६५ रनो से पराजित कर, तीन मैचों की शृंखला मे १-० से अपराजेय (जिसे कोई पराजित न कर सके।) अग्रता अर्जित कर ली है। इससे पूर्व, पहला टी-20 मैच वर्षा से बाधित रहा। इस एकपक्षीय विजय मे सर्वाधिक योगदान सूर्यकुमार यादव का रहा है, जिन्होंने २१७.६५ की प्रहार-दर (स्ट्राइक-रेट) से ग्यारह चौकों और सात छक्कों की सहायता से मात्र ५१ गेंदों मे अविजित १११ रन बनाकर भारतीय दल को सुरक्षित कर दिया था और अपने गेंदबाज़ों को लड़ने के लिए ताक़त दे दी थे। न्यूज़ीलैण्ड की ओर से टिम साउदी ने हेट-ट्रिक (लगातार तीन विकेट लेना) लेते हुए, ३४ रन देकर भारत के ३ विकेट लिये थे।

भारतीय दल ने २० ओवरों मे ६ विकेटों पर १९१ रन बनाये थे, जबकि न्यूज़ीलैण्ड का दल सभी विकेटों को खोकर १८.५ ओवरों मे १२६ रन ही बना सका था। भारत की ओर से दीपक हुड्डा ने १० रन देकर सर्वाधिक ४ विकेट लिये थे। न्यूज़ीलैण्ड के कप्तान केन विलियम्सन ने अपने दल की ओर से ५२ गेंदों मे सर्वाधिक ६१ रनो का योगदान किया था। (यहाँ ‘दिया था’ अशुद्ध है।)

भारत के कप्तान हार्दिक पण्ड्या ने यदि समझदारी की होती तो भारत की कुल रन-संख्या २०० अथवा उसके पार होती। सूर्यकुमार के साथ साझेदारी करते हुए यदि हार्दिक ने केवल एक रन देकर सूर्यकुमार को बल्लेबाज़ी दे दी रहती तो भारत का स्कोर २०० अथवा उससे अधिक का हो सकता था और सूर्यकुमार एक वर्ष मे टी-20 मे सर्वाधिक रन बनानेवाले विश्व के प्रथम बल्लेबाज़ बन सकते थे; इतना ही नहीं, टिम साउदी हेट-ट्रिक लेने से वंचित रखे जा सकते थे। इतना ही नहीं, हार्दिक ने स्पिनरों को देर मे गेंदबाज़ी करने के लिए बुलाया था। यही कारण था कि अर्शदीप महँगे साबित हुए थे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० नवम्बर, २०२२ ईसवी।)