★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(एक)
भाषा बनावटी
शैली मिलावटी
प्रस्तुति हस्पताल में।
(दो)
भाषा बदरंग
शैली मलंग
प्रस्तुति मधुशाला में।
(तीन)
कथ्य निहत्था
तथ्य बेसुरे
“हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत”।
(चार)
भयंकर आँधी-तूफ़ान
कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं
असहयोग आन्दोलन है।
पाँच
बित्ताभर ज़मीन नहीं
नाम ‘पृथ्वीनाथ’
घोटाला-ही-घोटाला!
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ जुलाई, २०२१ ईसवी।)