अपनी धुन में मगन दार्शनिक कलाकार राजपाल यादव जब हरदोई के सण्डीला आये तो हंसाते-खिलखिलाते सबको अपना बना गए। एक स्कूल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे अभिनेता राजपाल यादव के साथ सेल्फी लेने वालों में होड़ लगी रही वहीं उन्होंने बच्चों को सफल जिंदगी के टिप्स भी दिए। कहाकि अपनी मात्रभाषा को जीवन में विशेष महत्व दें । पढ़ाई वालो सें ज्यादा कढ़ाई वाले बच्चों पर ध्यान दे। उन्होंने कहाकि अभिभावक बच्चों से खुलकर बात करें । जिस दिशा में बच्चा जाना चाह रहा हो उसे प्रेरित कंरे और दबाव न बनाये । बच्चों से कहाकि आप की कमजोरी का कोई मजाक उड़ाता है तो उसको अपनी मजबूती समझे। कहाकि मेरा कद सबसे छोटा था ये मेरी कमजोरी थी लेकिन क्लास में सबसे छोटा होने के कारण ही सबसे प्रिय था और जिंदगी को पूरी जिंदादिली से जी रहा हूँ।
बच्चों को अपने बारे में बताया कि नाटक ‘अंधेर नगरी चौपट राजा” के दौरान मिली तालियों ने दुनिया ही बदल दी। सोच लिया … अब तालियां पड़ें या गालियां, करियर तो एक्टिंग में ही बनाना है। एक लक्ष्य को पाने के लिए पूरी शिद्दत से लग गया और उसमें पूरी तरह रमा रहा आज आप सबके साथ हूँ। थिएटर मेरे लिए दाई मां और सिनेमा मां है । अभिनेता नहीं होता तो अपने गांव का छोटू होता। इस छोटे से ही मेरी फाइट थी, क्योंकि ये आदमी को नहीं उसकी सोच को छोटा बनाता है।
राजपाल यादव ने कहाकि प्रतिभा विरासत में नहीं मिलती वरना तमाम सुपरस्टारों के बच्चे भी सुपरस्टार बन जाते। कोई बूढ़ा नहीं होता। दिमाग सबका जवान ही होता है, बशर्ते उसे विचारों के जरिए पॉलिश करते रहें। सिर्फ पैसे से कोई आधुनिक नहीं हो जाता। अनुशासन और संवेदनशीलता के मामले में हम पश्चिमी देशों से बहुत पीछे हैं। धर्म चमत्कार नहीं दिखाता, सद्व्यवहार और समभाव सिखाता है। जो हो वही रहो, दूसरों जैसा बनने का सपना मत देखो वरना अपनी पहचान भी खो दोगे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी रही लेकिन उनके प्रसंशको की भीड़ बेकाबू रही तो सेल्फी लेने वालों की भीड़ भी।