नोटबंदी एक विश्लेषण

विजय कुमार-

नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध देश का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण एवं बड़ा अभियान था जिसमे देश के जनमानस ने पूर्ण सहयोग व समर्थन किया।भले ही देश के भ्रष्ट तंत्र ने इसमे सेंधमारी करने की कोशिश की और इसके उद्देश्य को आंशिक क्षति पहुंचाने में सफल रहे हों लेकिन इससे देश के बहुत से काले कुबेर प्रभावित हुए और वे सिस्टम के राडार पर चिन्हित किए जा सके।दिन प्रतिदिन जैसे जैसे इस महाभियान में चिन्हित किए गये ऐसे लोग या कंपनिया पकड़ में आ रही हैं देश की अर्थव्यवस्था एवं कर प्रणाली को भारी क्षति पहुँचाने वाले ये काले कुबेर देश की जनता के बीच बेनकाब भी हो रहे हैं। इससे देश की चलन अर्थव्यवस्था में कुछ समय के लिए मंदता आने के कारण इसका आंशिक नुकसान भी देश की निम्न व मध्यम आय वर्ग की जनता को उठाना पड़ा परंतु अपने सुनहरे भविष्य की आशा मे उसने इसे भी चुनौती के रूप में सहर्ष स्वीकार किया है।

अभी नोटबंदी के त्वरित प्रभाव उभरकर सामने आए हैं जिससे देश के निम्न एवं मध्यम वर्ग के सामने कुछ समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं जिससे वह असहज स्थिति महसूस कर रहा है लेकिन इससे होने वाले दूरगामी लाभ भी उसे मिलने वाले हैं। देश के सार्वजनिक बैंकों की स्थिति नोटबंदी से मजबूत हुई है और कम व्याज पर ऋण देने हेतु उनकी पूंजी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।प्राप्रटी एवं आवास के क्षेत्र में आसमान छूती कीमतों में ब्रेक लगा है एवं होमलोन आदि पर व्याज की दरें कम हुई हैं। नोटबंदी ने देश को एक स्वस्थ आर्थिक परंपरा की ओर ले जाने हेतु प्रेरित किया है जिसके फलस्वरूप आयकर दाताओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है।लोगों में इस चेतना का संचार हुआ कि जब हम आत्मसंतुष्टि के लिए मंदिर,मस्जिद ,गुरुद्वारों एवं चर्चों में चढावा दे सकते हैं तो देश के संचालन एवं प्रगति के लिए अपने हिस्से का कर देकर अपनी सहभागिता क्यों नहीं सुनिश्चित कर सकते।
सर्वव्याप्त राजनीतिक,प्रशासनिक एवं व्यापारिक भ्रष्टाचार के कारण अमीरों एवं गरीबों के बीच असमानता में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी थी।कुछ लोग बहुत तेजी से भ्रष्टाचार एवं कर चोरी के कारण और अमीर होते जा रहे थे जबकि गरीब वर्ग अपने शोषण के कारण और गरीब व बेवश।सामाजिक असंतोष का ग्राफ दिनों दिन बढ़ता जा रहा था उसमें लगाम लगाने व लोगों को स्वस्थ परंपरा की ओर बाध्य करने मे भी नोटबंदी ने एक उत्प्रेरक की तरह कार्य किया है। देश में जाली करेंसी में भी बाढ़ आ चुकी थी जो देश की अर्थव्यवस्था को दिनोदिन भीतर से खोखली करती जा रही थी चूँकि यह जाली करेंसी ज्यादातर देश में आतंकवादी एवं नक्सलवादी गतीविधियों को संचालित करने में प्रयोग की जाती थी अतः नोटबंदी से इन तंत्रों की आर्थिक रुप से कमर तोड़ने में सफलता मिली है।