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बच्चों को कोरोना से सुरक्षित बनाने को लेकर जागरूक करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

प्रचार सामग्री के जरिये पहुंचाए जा रहे जरूरी सन्देश


मुख्य चिकित्साधिकारी सूर्यमणि त्रिपाठी ने बताया है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर व्यवस्था को चाक चौबंद करने में जुटा है। इसी क्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय ने कुछ महत्वपूर्ण प्रचार सामग्री भी जारी की है, जिसमें बच्चों को कोरोना से सुरक्षित बनाने को लेकर बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

मुख्य चिकित्साधिकारी सूर्यमणि त्रिपाठी ने बताया है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका जाहिर की जा रही है, ऐसे में हमें पहले से ही सावधानी बरतनी है। जन्म से लेकर 12 माह तक के बच्चों को हम जरूरी सावधानी बरतकर किसी अप्रिय घटना से बच सकते हैं। लगातार कई दिनों तक यदि बच्चे को 101 डिग्री से अधिक बुखार या लगातार दस्त आयें, अत्यधिक खांसी, पसली का चलना, बच्चा दूध या खुराक लेना बंद कर दे, अत्यधिक रोये या निढाल पड़ जाए, पल्स ऑक्सीमीटर से नापने पर ऑक्सीजन स्तर 94 से नीचे हो तो बिना देरी किये नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या ए.एन.एम उपकेन्द्र पर लेकर जाएँ जहाँ बच्चे की जाँच के बाद उसे दवा दी जाएगी। श्री त्रिपाठी ने बताया-लक्षण युक्त शिशु (जिनका कोविड टेस्ट अभी ज्ञात नहीं है अथवा अथवा टेस्ट नहीं हुआ है) तथा कोरोना पॉजिटिव शिशु जिनको केवल बुखार के लक्षण हैं उनके इलाज के लिए हेल्थ वर्कर्स को दवा किट के बारे में बताया गया है। बच्चे को दवा चिकित्सक द्वारा बतायी गयी खुराक के अनुसार ही देनी है। बच्चे को दवा अलग-अलग आयु वर्ग और लक्षणों के अनुसार देनी है।

श्री त्रिपाठी ने बताया है कि लक्षण दिखने पर बच्चे को बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दवा नहीं देनी है। दस्त होने की स्थिति में बच्चे को जीवन रक्षक घोल देना है। एक लीटर पानी को उबालकर ठंडा कर लें। इसके बाद एक लीटर पानी में ओआरएस का पूरा पैकेट घोलकर एक बर्तन में ढक कर रखें। हर बार दस्त होने के बाद बच्चे को दें। समस्या की जानकारी के लिए राज स्तरीय हेल्पलाइन नम्बर- 1800-180-5145 या 104 पर कॉल करें छह माह तक के बच्चे को मल्टी विटामिन नहीं देनी है और बच्चे को पैरासिटामाल खाली पेट नहीं देना है।