एआरटीओ आफिस में रेड, पकड़े गए दलाल, अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चलता है खेल

एआरटीओ आफिस में यदि आम आदमी काम कराने आये और बाहरी लोगों (दलालों) को साथ न ले तो जूते घिस जाएँगे लेकिन फार्मेलटी पूरी नहीं हो पाएगी। इस बात से आम आदमी हलक़ान था और आजिज आकर जिला प्रशासन में इसकी शिकायत की। डीएम ने ग्रामीणों की शिकायत पर सिटी मजिस्ट्रेट को ऑफिस भेजा तो वहां सबसे पहले मेन गेट को लाक कराया और फिर बाहरी लोगों को चिन्हित कराना शुरु कर दिया। इस बीच दलालों से लेकर यहां आए लोगों में भगदड़ मच गई। कई दलाल तो दीवार कूद कर भाग निकले। लेकिन फिर भी दो लोग पकड़े गए जिन्हें हिदायत देकर छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार कोतवाली नगर के लखनऊ-हाइवे पर स्थित एआरटीओ आफिस की बिल्डिंग है। आफिस के अंदर और बाहर की दीवारों पर भले ही ये लिखा गया हो ‘दलालों का प्रवेश वर्जित है लेकिन सूत्रों की मानें तो लर्निंग लाइसेंस से लेकर परमानेन्ट लाइसेंस या फिर आरसी, परमिट और रिनिवल ये सारे काम दलालों के चैनल से चुटकी बजाते हो जाते हैं। यदि आम आदमी इस चैनल को छोड़कर डायरेक्ट इन कामों का आवेदन लेकर इस आफिस में इंट्री कर जाए तो जूते घिस जाएँगे लेकिन फार्मेलटी पूरी नहीं हो पाएगी। एआरटीओ आफिस के इन दलालों ने आफिस के बाहर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर अपनी-अपनी गुमटियां रख छोड़ी हैं, जिस पर लड़के मौजूद होते हैं जो फार्म आदि भरने की फार्मेल्टीज पूरी करते हैं और मालिक अंदर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अपनी और उनकी कमाई की गणित सेट करते रहते हैं।
इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी पुलकित खरे को एक पीड़ित ने फोन करके दी तो डीएम ने इसकी जांच पड़ताल का प्रभार सिटी मजिस्ट्रेट वंदिता श्रीवास्तव को दिया और मौके पर भेजा। जब सिटी मजिस्ट्रेट वहां पहुंची तो भगदड़ मच गई। कई बाहरी लोग दीवार कूदकर भाग निकले। लेडी सिंघम बनी सिटी मजिस्ट्रेट ने एक को पकड़ लिया और हिदायत देकर छोड़ दिया। डीएम ने बताया कि आम आदमी को किसी भी प्रकार की परेशानियों का यदि सामना करना पड़ेगा तो वो इससे भी अधिक कड़ाई से पेश आएंगे।