★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ का ‘वास्तविक चरित्र’ उसके गठन के ठीक बाद से प्रतिदिन किसी-न-किसी रूप में सामने आता रहा है। इस कथित सरकार ने बैंकिंग प्रणाली को पूरी तरह से अपने राजस्व को भरने के लिए अनुकूल कर लिया है और जनसामान्य को अपने तरह-तरह के आर्थिक हठकण्डे से त्रस्त करके रख दिया है। इसके कारण लगभग ७ वर्षों से देश के सुरक्षित कहलानेवाली धनराशि पर सरकारी निरंकुशता की तलवार लटकी आ रही है। यही कारण है कि ३१ मार्च, २०२१ ई० को यह सरकारी घोषणा कर दी गयी थी– जनता की छोटी-छोटी बचत-योजना से मिलनेवाले ब्याजदर घटा दिये गये हैं।

उल्लेखनीय है कि देश में नये वित्तीय वर्ष की १ अप्रैल, २०२१ ई० से सामान्य बचत-धनराशि, वरिष्ठ नागरिक जमाराशि, सुकन्या बचत-राशि तथा एन०एस०सी०- पी०पी०एफ० के ब्याजदर में बड़ी संख्या में कटौती शुरू हो चुकी है।
मोदी-सरकार के वित्तमन्त्रालय के अनुसार, जनसामान्य, विशेषत: निचले स्तर की जनता को बचत खातों पर जो वार्षिक ब्याज ४℅ दिया जाता था, अब उसे .५% घटाकर ३.५℅ कर दिया गया है। इतना ही नहीं, पी०पी०एफ० (पब्लिक प्रॉविडेण्ट फण्ड) पर दिया जानेवाला जो ब्याजदर ७.१℅ था, उसे भी घटाकर ६.४% कर दिया गया है। इस निर्मम और निकृष्ट मोदी-सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों की गरदन पर भी तलवार चला दी है। इसके लिए वरिष्ठ नागरिकों को जो ब्याज ७.५℅ दिया जाता था, उसमें लगभग १℅ की कमी करते हुए, ६.५ ℅ कर दिया गया है। आज हमारे देश में उन वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक स्थिति बदतर है, जिनकी आय का कोई ठोस आधार नहीं है; इसी गठबन्धन की निर्मम सरकार ने पेंशनयोजना भी समाप्त कर दी थी और अब हैरत करनेवाली सूचना है कि सर्वाधिक कटौती वरिष्ठ नागरिकों-द्वारा जमा की गयी धनराशि से मिलनेवाले ब्याज में की गयी है। इतना ही नहीं, वरिष्ठ नागरिकों को उनको मासिक खाते पर भी मिलनेवाले ६% ब्याज को घटाकर ५.७% कर दिया गया है।

पी० पी० एफ० (पब्लिक प्रॉविडेंट फण्ड) के माध्यम से जो लोग निवेश करते हैं, उन्हें भी इस लोभी मोदी-सरकार ने नहीं बख़्शा है। उन्हें जो ब्याजदर ७.१℅ मिल रहा था, अब उसमें कमी करते हुए, उसे ६.४℅ कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सुरसा राक्षसिन के मुँह की तरह से बढ़ता जा रहा सरकार का पेट इतने से कहाँ भरनेवाला है। यही कारण है कि उसकी पूर्ति करने के लिए उसने एन० सी० सी० (नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट) पर ब्याजदर को ६.८% से घटाकर ५.९% कर दिया है।
“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा लगानेवाला छद्म चौकीदार नरेन्द्र मोदी का दिल इतने पर भी नहीं पसीजा और उसने उन लोग की आशा पर तुषारपात किया है, जिन्होंने अपनी बेटियों के भविष्य सँवारने के लिए ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ से स्वयं को जोड़ा था। उनके लिए यह दु:खदायी समाचार है कि ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के खाताधारकों को जो वार्षिक ब्याज ७.६℅ की दर से दिया जाता था, अब उन्हें मात्र ६.९ ℅ की दर से ब्याज मिलेगा। इस प्रकार ‘सुकन्या समृद्धि’ खाते की ब्याजदरों में ०.७℅ की कटौती करके मोदी-सरकार ने अपना धूर्त्ततापूर्ण चरित्र उजागर कर दिया है।
हिन्दू और हिन्दूत्व की पंजीरी फाँकनेवालो और चरणामृत चाटनेवालो! आँखें खोलो, वरना यही ‘हिन्दू-हिन्दुत्व-मन्दिर-मोह’ तुम सभी को कहीं का नहीं छोड़ेगा। इस निर्दय और शोषक मोदी-सरकार की निगाहें देश की जनता के ख़ून-पसीने से बनायी गयी उस अचल सम्पदा पर भी है, जिसे ‘भूभाग’ और ‘घर’ कहते हैं। नरेन्द्र मोदी आनेवाले ‘कल’ में देश के नागरिकों पर मन-प्राण इतना शिकंजा कसवा देगा कि दम लेना भी दूभर हो जायेगा।
‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ की यदि शीघ्रातिशीघ्र अरथी नहीं उठी तो देश और देशवासी परतन्त्रता की अर्गला से जकड़ लिये जायेंगे।
जागो भारत! जागो!
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ अप्रैल, २०२१ ईसवी।)