हरदोई- तिनका-तिनका जोड़कर एक ढेर बनता है। जिससे बड़े से बड़े कार्य आसानी से पूरे होने लगते हैं। लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा भी उन लोगों की ताकत जिनकी बाजुएं पहले गरीब की मदद से गुरेज करती हैं। यही हाथ एक दूसरे से ऐसे मिल गए कि एक कारवां समाज में गरीबों की मदद को बेझिझक निकल पड़ा। फिर क्या शहर से निकली इस कारवें की रोशनी आखिरकार गरीबों तक पहुंच गई।लगभग दो वर्ष पूर्व शहर के आजाद नगर मोहल्ला जिसमें पेशे से शिक्षक सचिन मिश्र ने गरीबों की मदद करने की ठान ली। इसके लिए पहले तो कुछ अपनी सैलरी के एकत्र कर एक दो गरीबों को यत्र-तत्र मदद मुहैया कराई गई। लेकिन इससे कुछ गरीबों की मदद का सपना पूरा नहीं होता दिखा। इसी को जब सचिन ने मोहल्ले के ही अपने साथियों से सहयोग मांगा तो वह भी इस कार्य को तैयार हो गए। एक के बाद एक लोग मिलने से लगभग 50 लोगों की जंजीर बन गई। जिसका परिणाम ‘नेकी की दीवार‘ संस्था का रजिस्ट्रेशन कराया गया। अब यह नेकी की दीवार शहर में हर रविवार को शहर के कुछ चैराहों पर स्टाॅल लगाकर पुराने कपड़े, खाने-पीने की वस्तुएं, जूते-चप्पल आदि सामान गरीब रिक्शा चालकों, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले परिवारों, आर्थिक तंगी होने के कारण किताबें न खरीद पाने वाले गरीब बच्चों को किताबें आदि मुहैया कराई जा रही हैं। सचिन बताते हैं कि होली के त्यौहार पर कुछ रूपए एकत्र कर गरीबों को नए पकड़े, मिष्ठान आदि वितरित करते हैं। इसके साथ ही दीवाली के त्यौहार पर गरीबों को घर जाकर नेकी की दीवार संस्था के लोग खीली व मिठाई, एक दो बार प्रयोग किए हुए पकड़े आदि दिए जा रहे हैं। शहर से निकली यह मदद की रोशनी ग्रामीण अंचलों से शहर आकर रोजी-रोटी की इंतजाम करने वाले गरीबों की खुशी बन रह गई। अब नेकी की दीवार जिले के विकास खंड भरावन, पिहानी में भी अपनी शाखाएं खोलने जा रही है।
गरीबों से जुड़ रहा खून का नाता
नेकी की दीवार संस्था में जहां एक के बाद एक मददगार गरीबों की मदद को हांथ बढ़ा रहा है। तो वहीं अब एक सदस्य से शुरू हुए कारवें में 120 लोग शामिल हो गए हैं। केवल गरीबों को खाना पीना, कपड़ा आदि नहीं बल्कि उनके खून का नाता भी जोड़ा जा रहा है। ब्लड डोनेशन कैंप में हर तीसरे महीने सभी 120 सदस्य रक्तदान करते हैं। जो आवश्यकता पड़ने पर गरीब परिवारों को निशुल्क मुहैया कराया जाता है।
तीन परिवारों में मिल गई रोशनी
नेकी की दीवार संस्था की ओर से विभिन्न दुर्घटनाओं में हुई परिवार के मुखिया की असमय मौत में उनके बाल बच्चों के प्रति संवेदना दिखाई गई। सड़क हादसे में मारे गए प्रभात उपाध्याय, कामेश्वर प्रसाद व हाल ही में कैंसर पीड़ित बब्लू मिश्रा के परिवार को लगभग 30-30 हजार की मदद सदस्यों की एकजुटता से दी जा चुकी है।