डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
जम्मू-कश्मीर में हमारे दो सैनिक सत्यनारायण यादव और विजय कुमार पाण्डेय की हत्या पाकिस्तानियों ने कर दी है। अब भी निर्मम मोदी-सरकार की आँखें नहीं खुल रही हैं। रमज़ान के नाम पर अभी तक ‘युद्धविराम’ लागू है; जबकि पाकिस्तान हमले-पर-हमला किये जा रहा है और छप्पन इंच का सीना ‘अच्छे दिन’ का भजन सुनाता फिर रहा है।
महबूबा मुफ़्ती के निर्देशन में ये सारी घटनाएँ की जा रही हैं, इससे इंकार नहीं किया जा सकता और सत्ता के मद में चूर तथाकथित मोदी-सरकार पत्थरबाज़ों को ‘पैकेज’ दे रही है और हमारे सुरक्षाबल के आत्मबल का अपहरण कर रही है।
कितना आश्चर्य होता है, जब देश के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं–पाकिस्तान का असली चेहरा लाने के लिए, उसे बेनक़ाब करने के लिए रमज़ान के अवसर पर ‘युद्धविराम’ किया गया है।
चार सालों से रमज़ान के अवसर पर किये गये युद्धविराम की अवधि में पाकिस्तान का घटिया चरित्र यदि नरेन्द्र मोदी नहीं देख पाये हैं तो उन्हें अपनी आँखों की शल्यचिकित्सा करानी पड़ेगी। सीमा की रक्षा करते हुए हमारे सैनिक मोदी-सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के कारण मारे जा चुके हैं; मारे जा रहे हैं।
‘जैश’ के दुर्धर्ष आतंकी नरेन्द्र मोदी को खुली चुनौती दे रहे हैं और मोदी विदेशों में ‘पिकनिक’ मना रहे हैं। मोदी की ‘अतिरिक्त’ विदेशनीति का प्रदर्शन अब बहुत हो चुका है; उन्हें अब देश की आधारमूलक समस्याओं और अभावों का अध्ययन करना होगा; समुचित मार्ग पर चलना होगा, अन्यथा देश की जनता ने ‘उन्हें’ राजनीति से बाहर का रास्ता दिखाने का मन तो बना ही लिया है।
पिछले चार वर्षों में देश की सामाजिक-आर्थिक क्षति पर्याप्त मात्रा में हुई है; परन्तु मोदी-सरकार के लिए कोई फ़र्क़ नहीं।
मोदी-सरकार में साहस होता तो बेईमान और आतंकियों के सुर में सुर मिलाते हुए, महबूबा मुफ़्ती से समर्थन वापस लेकर, वहाँ ‘राष्ट्रपति-शासन’ लागू करवा देते; परन्तु सत्तान्ध सरकार अपनी दुर्गति की पटकथा स्वयं लिखने पर उतारू है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ३ जून, २०१८ ई०)