विशेष रिपोर्ट—
● विभिन्न संगठनों के जिला पदाधिकारियों की टीम के निरीक्षण मे खबरों की हुई पुष्टि।
अझुवा/कौशांबी : कल सायंकाल न.पं. अझुवा द्वारा संचालित अझुवा की सरकारी गौशाला मे भूखे पेट गौवंशों की बदहाली एवं बड़ी तादाद मे हो रही मौतों से संबंधित विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों मे प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए अंकित द्विवेदी जिलाप्रमुख अखिल भारतीय गौरक्षा महासंघ, रूपेन्द्र शर्मा जिला सुरक्षा प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद, विजय कुमार जिलाध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार संघ, संतोष विश्वकर्मा जिला उपाध्यक्ष अखिल भारतीय गौरक्षा महासंघ, सौरभ केसरवानी जिला महामंत्री अखिल भारतीय गौरक्षा महासंघ व नामित सभासद न.पं. अझुवा, संजय मौर्य, हर्ष सोनी आदिक ने गोशाला का औचक निरीक्षण किया। जिसमे गौशाला मे करीब दो सौ पशु भूखे पेट बदतर हालत मे मिले।
निरीक्षण करने पर करीब चार-पांच क्विंटल भूसा मिला तथा पशु आहार या चोकर नही मिला। मौके पर पशुओं की देखभाल मे लगाए गए तीन कर्मचारी मिले जिनसे पूछताछ मे पता चला कि चार दिन पहले गोशाला मे भूसा आया था। शाम करीब पांच बजे पशुओं की चरही का अवलोकन करने पर चरहियां खाली मिलीं। मौके पर अधिशासी अधिकारी अझुवा को बुलाने पर उनकी ओर से न.पं. अझुवा के वरिष्ठ लिपिक साकेत चंद्र श्रीवास्तव व गौशाला की देखभाल के लिए नियुक्त नायब मोहर्रिर मौके पर पहुंचे। गौशाला मे एक टीन शेड पड़ा मिला जिसमे क्षमता से अधिक गायों, बैलों व बछड़ों को रखा गया था। बगल के टीनशेड के लिए बनाए गए स्थान पर सिर्फ पिलर खड़े मिले। गौशाला मे भूसा खुले मे रखा मिला और भूसा भंडारण के लिए बनाए गए कक्ष मे छत या टीन शेड नही पड़ी थी। गौशाला की बाउंड्री पर गेट नही लगा था और तीन स्थान पर बाउंड्री खुली हुई मिली।
जब इस संबंध मे वरिष्ठ लिपिक से पूछताछ की गई तो उन्होने अवगत कराया कि गौशाला निर्माण की प्रथम किश्त प्राप्त हुई थी उसकी उपयोगिता के प्रमाणपत्र के साथ शासन से द्वितीय किश्त देने के लिए तीन बार पत्रचार किया जा चुका है लेकिन अभी तक गौशाला की द्वितीय व अंतिम किश्त प्राप्त नही हुई जिससे गौशाला निर्माण का कार्य अभी तक पूर्ण नही कराया जा सका। जब उनसे गौवंशों के भोजन के संबंध मे सवाल किया गया तो बताया कि प्रतिदिन 30 रुपये प्रति पशु सरकार से उनके भोजन के लिए धन मिलता है जिससे दोनो समय पशुओं को भूसा दिया जाता है।
जब उनसे पशुओं को दिए जाने वाले चोकर या पशु आहार के संबंध मे सवाल किया गया तो बताया कि कई महीने से चोकर की आपूर्ति करने वाली संस्था ने चोकर उपलब्ध नही कराया इस संबंध मे जिलाधिकारी से कई बार पत्राचार भी किया गया लेकिन पशुओं के लिए चोकर की आपूर्ति अभी तक नही कराई गई। शाम करीब पांच बजे जब उनसे कहा गया कि क्या अभी तक पशुओं को भोजन देने के समय नही हुआ तब उन्होंने मौके पर कर्मचारियों को आदेशित किया और उन्होने झालों मे भूसा भरकर चरहियों मे डाला। खाली पड़ी चरहियों मे भूसा पाकर सभी भूखी गायें व गौवंश सूखे भूसे पर टूट पड़े। जब उनसे मौके पर गौशाला के रजिस्टर की मांग की गई तो उन्होने नगर पंचायत कार्यालय मे रजिस्टर दिखाने की बात की।
नगर पंचायत आने पर पंद्रह मिनट तक रजिस्टर उपलब्ध कराने का इंतजार किया गया और रजिस्टर उपलब्ध न कराने पर सभी पदाधिकारी व कार्यकर्तागण धरने पर बैठ गए और रजिस्टर की मांग करने लगे तब अधिशासी अधिकारी से फोन पर वार्ता के बाद गौशाला का रजिस्टर पेश किया गया। जिसमे कई पन्ने आपस मे चिपके हुए मिले जब इस संबंध मे पूछताछ की गई तो रजिस्टर अंकन मे त्रुटियों का हवाला देकर उन्हे आपस मे चिपकाने की बात की गई।
रजिस्टर पर अंकित विवरण के अनुसार गौशाला मे वर्तमान मे उपस्थित पशुओं की संख्या 194 मिली। रजिस्टर मे अंकित विवरण के अनुसार प्रतिदिन प्रति पशु तीन किग्रा भूसा उन्हे दिया जा रहा है, चोकर की अंतिम आपूर्ति 08 जनवरी 2022 दर्ज थी तथा 10 जनवरी को अंतिम स्टाक 53.5 कि.ग्रा. दर्ज मिला। उसके बाद से चोकर की खपत और आपूर्ति का विवरण खाली मिला।
भूसे की आपूर्ति मे दो दिन पहले भूसे की आपूर्ति दिखाई गई जबकि मौके पर उपस्थित कर्मचारी के अनुसार आखिरी बार चार दिन पहले भूसे की आपूर्ति हुई थी और भूसे का आज का स्टाक 12-13 क्विंटल के मध्य अंकित मिला जबकि मौके पर 4-5 क्विंटल भूसा ही मिला। जब गौशाला मे पांच दिन पहले निरीक्षण करके पत्रकारों ने खबर चलाई थी तो उसके मुताबिक गौशाला मे भूसे का स्टाक रिक्त मिला था। खबर चलने के अगले दिन पशुओं के लिए भूसा की आपूर्ति सुनिश्चित कराई गई जबकि रजिस्टर मे अंकन के अनुसार भूसे का स्टाक उपलब्ध था । गौशाला मे उपस्थित कर्मचारी ने पूछताछ मे चार दिन पहले आखिरी बार भूसे की आपूर्ति का जिक्र क्यों किया जबकि रजिस्टर मे तो दो दिन पहले भी भूसे की आपूर्ति दर्ज पाई गई। ऐसे मे मात्र रजिस्टर पर ही गौवंशों को भोजन दिए जाने से इंकार नही किया जा सकता है।
मौके पर चरहियों मे शाम पांच बजे भूसे का तिनका न मिलना और कहे जाने पर उन्हे भूसा डालना, गौवंशों का भूसा पाते ही उन पर टूट पड़ना और सबसे बड़ी बात उनके खाली कोख और स्थिति वास्तविकता की सारी कहानी स्वयं बयां करने को काफी थी और अखबारों मे प्रकाशित खबरों मे सत्यता साफ देखने को मिली। जब भूख से हो रही पशुओं की मौतों के संबंध मे रजिस्टर पर दर्ज अभिलेख का अवलोकन किया गया जिस पर उसमे आखिरी मृत पशु का अंकन 18 मार्च 2022 को दर्ज मिला। साथ ही अब तक गौशाला मे मृत पशुओं की संख्या अत्यंत कम दिखी। जबकि खबरों के मुताबिक एक सप्ताह के भीतर ही गौशाला मे कई पशुओं की मृत्यु हुई थी और वे पशु आज निरीक्षण के दौरान गौशाला मे उपस्थित भी नही मिले। साथ ही गौशाला के पास की भूमि पर ही अनेक पशुओं को दफन करने के सुराग मिले। ऐसे मे निरीक्षण करने वाले विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर इस संबंध मे चली व विभिन्न अखबारों मे प्रकाशित खबरों को सही पाया और इस गंभीर मुद्दे पर आगे की रणनीति तैयार कर अझुवा की गौशाला की दुर्दशा पर भूख और अव्यवस्था का शिकार होकर दम तोड़ रही गायों की बेहतर देखभाल के लिए प्रादेशिक व राष्ट्रीय नेतृत्व को मामले की जानकारी देते हुए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई कराने हेतु सरकार एवं जिलाधिकारी कौशांबी का ध्यान आकृष्ट कराया है।