करीब सौ सालों से ग्राम समाज की जमीन पर आशियाना बना चुके लोगों का कब्जा हटवा दिया गया जिसके चलते गम और गुस्से के बीच लोगों ने खाना बनाया और खाया। खुले आसमान के नीचे लोग रात गुजारने को जहां मज़बूर है वहीं दिन धूप में कट रहा है । जिससे लोगों में बेहद नाराजगी है। वहीं कई ऐसे सवाल हैं जो लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर रहें हैं। आशियाना ढह जाने के बाद लोगों ने अपने नन्हे मुन्ने बच्चों के साथ खुले आकाश के नीचे रातें गुजारी हैं और अपनी आंखों के सामने भीख मांगकर जोड़े गए आशियाने को टूटता देखकर लोगों का दिल छलनी है । लोग उस मंजर को भूल नहीं पा रहे।
बता दें कि कोतवाली देहात के ओमनगर में अवैध तरीके से ग्राम समाज की जमीन पर बने मकानों को ढाहने के बाद से अफसरों ने भी डेरा डाल रखा है। वहीं ओमनगर के लोग विरोध जता रहे हैं। हालांकि पुलिस उनको किसी न किसी तरह से समझा बुझाकर कानून का आइना दिखाकर मामले को शान्त करने में लगी हुई है। इस व्यवस्था को देखकर हर किसी को इस तरह से आशियाना उजाड़ने की बात को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। अतिक्रमण हटने के बाद बेघर हुए लोगों का घरेलू सामान सड़क के किनारे या फिर गलियो में पड़ा हुआ है। कहीं कहीं पर ओमनगर के लोगों ने अपना सामान चारपाईयों पर रख रखा है। नन्हें मुन्ने बच्चे भी उसी सामान के पास बैठे हैं। इस तरह के दृश्य हर किसी व्यक्ति को सोचने को मजबूर कर रहे हैं। वहीं ओमनगर के लोग सरकार की इस नीति को लेकर उसे कोसने में लगे हुए हैं।