विसर्जन के साथ ही पांच दिवसीय गणेश महोत्सव का हुआ समापन

सभी ने नम आंखों से दी गणपति बप्पा को विदाई

दीपक कुमार श्रीवास्तव

कछौना (हरदोई) – नगर कछौना में सोमेश्वर महादेव सेवादार समिति के तत्वाधान में आयोजित गणेश महोत्सव शुक्रवार को पारंपरिक ढंग से गणपति की भव्य प्रतिमा के विसर्जन के साथ ही श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ । पांच दिनों तक चले इस आयोजन में नगरवासियों ने विघ्नहर्ता के दर्शन व पूजन के लाभ के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लुफ्त उठाया । विसर्जन से पूर्व भक्तों व श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे व सुंदर झांकियों के साथ नगर में भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकालकर कछौना के महाराजा को विदाई दी । कस्बे के पुरानी बाजार स्थित महोत्सव मैदान से शुरू हुई शोभा यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई गौसगंज मार्ग पर स्थित शारदा नहर पर समाप्त हुई ।

सोमेश्वर महादेव सेवादार समिति द्वारा नगर कछौना में सोमवार 2 सितंबर से आरंभ हुए अष्टम भव्य श्री गणेश महोत्सव का शुक्रवार को मूर्ति विसर्जन के साथ ही समापन हुआ । नगर कछौना के पुरानी बाजार स्थित गणेश महोत्सव मैदान में शुक्रवार सुबह गणपति की महाआरती के बाद यज्ञाचार्य द्वारा दोपहर में हवन पूजा अनुष्ठान कराया गया । जिसमें आयोजक समिति के सदस्यों के साथ भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण शास्त्री और युवा मोर्चा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष आकाश सिंह भी शरीक हुए । उसके बाद कछौना की महाराजा की भव्य विशालकाय मूर्ति को सुसज्जित रथ में सजाकर गाजे-बाजे, राजस्थानी ऊंट व सुंदर झांकियों के साथ नगर में शोभायात्रा निकाली गई । शोभायात्रा में हजारों की संख्या में भक्त व श्रद्धालु महिलाएं,पुरष व युवा शामिल हुए। गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जोरदार जयकारों की गूंज के साथ रंग गुलाल की होली के बीच आरंभ हुई शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्ग स्टेशन रोड से होते हुए रेलवेगंज स्थित दुर्गा मंदिर तक और वही से घूमकर वापस होकर नगर के मुख्य मार्ग से होती हुई गौसगंज मार्ग पर स्थित शारदा नहर के लिए रवाना हुई । शोभा यात्रा के दौरान राजस्थानी ऊंट, विभिन्न प्रकार के बैंड बाजे, औघड़ नृत्य, हवा में झूले पर झूलते राधा कृष्ण, सुंदर झांकियां और डीजे की धुन पर नाचते मदमस्त युवा आकर्षण का केंद्र रहे । इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से कोतवाल राय सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा । क्षेत्राधिकारी बघौली अखिलेश राजन ने भी शोभायात्रा में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया । कछौना-गौसगंज मार्ग पर नगर कछौना से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित शारदा नहर पर विधिवत मंत्रोच्चारण और आरती के बाद देर शाम लगभग आठ बजे विघ्नहर्ता गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा का हाइड्रा के माध्यम से शारदा नहर में विसर्जन किया गया । मूर्ति विसर्जन के दौरान सोमेश्वर महादेव सेवादार समिति के सदस्यों नेता जी राव मराठा, पंकज शुक्ला, बबलू गुप्ता, क्रांतिवीर सिंह, अनूप सिंह, अंशू गुप्ता, प्राशू गुप्ता, शशांक अवस्थी, विनय शुक्ला, पंकज गुप्ता, लालजी गुप्ता, हर्ष द्विवेदी, गणेश शुक्ला, तुलसी गुप्ता, बराती गुप्ता, अनूप गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, सूरज पांडे, धीरज गुप्ता सहित भारी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने सुख शांति के साथ ही भगवान गणपति से अगले बरस जल्दी आने की कामना के साथ गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ का उदघोष करते हुए नम आंखों से गणपति बप्पा को विदाई दी ।

आखिर क्यों करते हैं गणेश की प्रतिमा का विसर्जन ?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से लगातार दस दिनों तक महाभारत कथा भगवान श्री गणेश को सुनाई थी। जिसे श्री गणेश जी ने इसे अक्षरश: लिखा था। वेद व्यास ने जब दसवें दिन देखा कि निरंतर लेखन की मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया था । इसलिए वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडा किया था। तभी से गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है। इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया। 

यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई। माटी झरने लगी, तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा। इस बीच वेदव्यास जी ने दस दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है। साथ ही उन्हे दस दिनों तक स्वादिष्ट आहार चढ़ाने की भी प्रथा है।

विसर्जन के पीछे जीवन-मृत्यु का रहस्य

विसर्जन का नियम इसलिए है कि मनुष्य यह समझ ले कि संसार एक चक्र के रूप में चलता है । भूमि पर जो भी आया है वह प्राणी अपने स्थान को फिर लौटकर जाएगा और फिर समय आने पर पृथ्वी पर लौट आएगा। विसर्जन का अर्थ है मोह से मुक्ति, आपके अंदर जो मोह है उसे विसर्जित कर दीजिए। आप बप्पा की मूर्ति को बहुत प्रेम से घर लाते हैं उनकी छवि से मोहित होते हैं लेकिन उन्हें जाना होता है इसलिए मोह को उनके साथ विदा कर दीजिए और प्रार्थना कीजिए कि बप्पा फिर लौटकर आएं, इसलिए कहते हैं गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ ।