गोशाला संरक्षण समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पुलकित खरे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि गोशालाओं का संचालन सुचारू रूप से किया जाये और गोशाला की भूमि पर अवैद्य कब्जा हटाया जाये तथा जलनिकासी की व्यवस्था करने के साथ साथ शासकीय योजनाओं से गोशालाओं का विकास एवं चारागाह बनवाये जायें।
उन्होने कहा कि गोशाला को स्वावलंबन की ओर बढ़ाने हेतु बायोगैस, कम्पोस्ट, पंचगव्य से बनाया जाने वाले विभिन्न पदार्थ, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की कॉयल, गोनाइल (गोमूत्र से बनी फिनायल) औषधियों आदि के उत्पादन पर जोर दिया जाये और गोशालाओं को केन्द्र बनाते हुये आस-पास के क्षेत्र में गो आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी कराई जाये तथा विकास एवं उद्यान विभाग आस पास के किसानों को गोशाला से गोबर, गोमूत्र से बने खाद व कीट नाशक उपलब्ध कराये जायें।
जिलाधिकारी ने कहा कि वन व उद्यान विभाग द्वारा गोबर से बने गमलों का प्रयोग किया जाये तथा राजकीय कार्यालयों की स्वच्छता के लिये गोनाइल का प्रयोग किया जाये तथा गोबर से बने लट्ठों का शमशान घाट व सर्दियों में अलाव जलाने में प्रयोग किया जाये और सामाजिक वृक्षारोपण व आराक्षित वन क्षेत्र के वृक्षारोपण में अधिक से अधिक चारा प्रजति के वृक्ष लगाये जायें। उन्होने कहा कि उद्यमियों को गोशाला के गोबर, गोैमूत्र के सद्पयोग हेतु बड़े बायोगैस/सीएनजी प्लांट लगाने के लिये प्रेरित किया जाये। बैठक में पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी आनन्द कुमार, डीएफओ सुशील चन्द्रा, जिला विकास अधिकारी राजितराम मिश्र, जिला उद्यान अधिकारी महेन्द्र कुमार, नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी सहित अन्य संबन्धित अधिकारी मौजूद रहे।