युवा केवल आश्वासन नहीं, अवसर चाहते हैं
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं युवाओं के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाती हैं। जब कोई अभ्यर्थी दिन-रात पढ़ाई करके परीक्षा की तैयारी करता है और परीक्षा से पहले […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं युवाओं के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाती हैं। जब कोई अभ्यर्थी दिन-रात पढ़ाई करके परीक्षा की तैयारी करता है और परीक्षा से पहले […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव- जब अकर्मण्यता को छिपाकर जीवन जीने के लिए आवश्यक संसाधनों को सच्चाई और पुरुषार्थ से जुटाने की बजाय हिंसा से छीन लिया जाता हैए चोरी कही जाती है। इससे चोर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अगली सुबह कल्लूपुर में एक और खबर फैली। गाँव के मास्टर रघुवीर की बेटी नीलम रात से गायब थी। रघुवीर के घर में कोहराम मचा था। नीलम उन्नीस साल की थी। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरीफ ने मजार के पीछे की टूटी-फूटी कोठरी को अपना ठिकाना बना लिया था। दिन में वह वहाँ कम ही रहता। शाम ढलते ही उसका असली समय शुरू होता। लोग आते। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– कल्लूपुर गाँव में शाम जल्दी उतरती थी। सूरज डूबने से बहुत पहले खेतों की पगडंडियाँ सुनसान होने लगतीं, बैलों की घंटियाँ दूर कहीं बजतीं और घरों के दरवाजे एक-एक करके बंद […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– We are the future, bold and bright,Guided by knowledge, truth, and light.Dream with courage, work each day,Success will surely find its way.Books and values make us strong,Helping us know right from […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Many languages, many song,One country where all belong.Different cultures, different ways,Together we sparks India’s days.Respect and love make us strong,Helping every heart belong.Hand in hand we’ll always grow,Sharing kindness everywhere we […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav Whenever I feel so sad inside.All my smiles just run and hide.I build a little room with quiet wall.Where no one hears my voice at all. It grows so big, it […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– दण्डकारण्य में प्रवेश करते-करते अनेक सप्ताह बीत चुके थे। अब वन ने इन तीनों यात्रियों को स्वीकार कर लिया था। जहाँ पहले पक्षी उड़ जाते थे, अब वे समीप बैठ जाते। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट पीछे छूट चुका था। अब वन का स्वरूप बदल रहा था। यहाँ वृक्ष अधिक विशाल थे। उनकी जटाएँ मानो धरती को आलिंगन करती थीं। लताएँ शताब्दियों पुराने वृक्षों से इस […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। वन की निस्तब्धता और भी गहन होती जा रही थी। वृक्षों की छाया मानो स्वयं इस संवाद को सुनने के लिए ठहर गई थी। मंद पवन बह रही […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आर्य सुमन्त्र मौन थे। उनके पास शब्द थे, पर वे शब्द जैसे अपने अर्थ खो चुके थे। वे सीता के मुखमण्डल को देख रहे थे—वह मुख, जो राजमहलों की सुख-संपन्नता में […]
तुम्हारे पास कमी है वक्त की और मै खुद मे ही बहुत व्यस्त हूँ।हमारे रास्ते कभी एक नहीं तुम अपने मे और मैं अपने मे मस्त हूँ।जानिबे मंज़िल जाते कभी टकरा गये तो बात होगी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– “विद्या परमं धनम्।” — यह केवल एक सूक्ति नहीं, अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। मानव इतिहास में यदि किसी संस्कृति ने ज्ञान को सत्ता, संपत्ति और सामर्थ्य से ऊपर स्थान […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– जीवन चाहे जितनी भी परीक्षाएँ ले,कितने ही कठिन मोड़ क्यों न आएँ,बस एक दीप सदैव जलाए रखना—“मैं कर सकता हूँ…मैं आगे बढ़ सकता हूँ…और मेरा विश्वासमुझे वहीं पहुँचाएगाजहाँ मेरी नियति चमकती है।” […]
Motivator : Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In the heart of the earth, cradled within nutrient-rich soil, a minuscule seed holds the promise of burgeoning into a majestic tree. Just as this seed requires optimal conditions […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— कभी मत सोचनाकिसी लड़के या आदमी कोचाहा है।हमेशा याद रखनाये अपना दूसरा जिस्मपाया है।जो होना था हुआ जाने दोनये दिनो की आहट को सुनोऔर उन्हें आने दो।प्यार हो या दोस्तीजब […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Time is great, so always wait.Fortune comes some time late.When darkness falls you alone,Loved ones leave you to atone.When your shadow left you.When your dears kicked you.Don’t feel bad think […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– When someone asks what is Dharma and what it signifies?Say, it’s what we uphold, where true meaning lies.Following it brings us prosperity, freeing us from sorrow.Attaining supreme joy and bliss, into […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- ओ! वीणापाणि मा, ओ! पुस्तक धारिणि मा। ओ! ज्ञान दायिनी मा, ओ! हंसवाहिनी मा। कर तम का संहार, ज्ञान की ज्योति देती मा। ओ! वीणापाणि मा, ओ! पुस्तक धारिणि मा॥ विद्या की […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— कारगिल युद्ध के अमर नायकों मे से एक नायक कैप्टन अनुज नैय्यर आपको याद हैं! टाइगर हिल की सोलह हजार फ़ीट ऊँची पश्चिमी चोटी प्वाइंट 4875 (जिसे पिंपल-टू भी कहा जाता […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवन क्या है ?एक बहती हुई नदी है ।कंकरीले और पथरीले रास्तोंपर बहती हुई,सर्दी और गर्मी सहती हुई।जैसे नदी चलना नहीं छोड़ती है ऐसे ही ये जिन्दगी है ।अनेक रूकावटें और अनेक […]
कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- मेरा गांव मेरा देश मेरा ये वतन , तुझपे निसार है मेरा तन मेरा मन । आदित्य कुछ सोचते हुए कहता है कि ऐसा ही होता है गांव ? जहाँ हर […]
राघवेन्द्र कुमार ”राघव”- प्राचीन धर्म ग्रन्थ कहते है ” जो धारण करने योग्य हो ” वह धर्म है | लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में धर्म आडम्बर से ज्यादा कुछ नहीं | हम किसी भी धर्म की […]