आज (२८ दिसम्बर) जहाँ सेंचुरियन, दक्षिणअफ़्रीका मे खेले गये दो क्रिकेट टेस्ट मैचों की शृंखला के पहले मैच मे दक्षिणअफ़्रीका के पुरुषदल ने भारतीय दल को १पारी और ३२ रनो से लज्जाजनक पराजित कर, शृंखला मे १-० की अपराजेय अग्रता अर्जित कर ली है, वहीं ऑस्ट्रेलियाई महिलादल ने भारतीय महिलादल को तीन एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय मैचों की शृंखला के पहले मैच मे ६ विकेटों से पराजित कर, शृंखला मे १-० की अग्रता ले ली है।
भारत की दक्षिणअफ़्रीका मे शर्मनाक हार!
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दो टेस्ट मैचों की शृंखला के पहले मैच मे भारतीय बल्लेबाज़ी औसत से भी कम की दिख रही थी। उसका क्षेत्ररक्षण और गेंदबाज़ी औसत दर्ज़े की रही। अनुभवहीन गेंदबाज़ प्रसिद्ध कृष्णा का चयन करना, चयनकर्त्ताओं की अपरिपक्व मानसिकता को दर्शाता है।
रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल तथा श्रेयस अय्यर वहाँ की उछालभरी पिच को समझने मे नाकाम रहे। दक्षिणअफ़्रीका के अनुभवी बल्लेबाज़ डीन एल्गर ने, दोनो ही पारियों मे विफल प्रदर्शन करनेवाले, भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को समझा दिया है कि उछालभरी पिच पर कैसे खेला जाता है। हमे नहीं भूलना चाहिए कि दक्षिणअफ़्रीका कुल १० खेलाड़ियों के साथ खेल रहा था; क्योंकि उसके कप्तान वबूमा चोट लगने से खेल से बाहर थे।
भारतीय गेंदबाज़ों मे जसप्रीत बुमराह, मो० सिराज तथा अश्विन के अलावा अन्य भारतीय गे़दबाज़ असरहीन दिखे हैं। प्रसिद्ध कृष्णा और शार्दूल की गेंदबाज़ी-नीति समझ मे नहीं आ रही थी। इन दोनो से बेहतर गेंदबाज़ रवि बिश्नोई हैं, इसलिए यदि हो सके तो रवि बिश्नोई को अन्तिम मैच मे रखा जाये।
दक्षिणअफ़्रीका के तीव्रतम गेंदबाज़ :– रबाडा और बर्गर ने मिलकर दोनो ही पारियों मे भारतीय बल्लेबाज़ों की ‘बोकला’ छुड़ा दी थी। उछाल लेते बाहर जाते गेन्दों के साथ लगभग सभी भारतीय बल्लेबाज़ों ने छेड़ख़ानी की थी, जिसका परिणाम पराजय के रूप स्वीकार करना पड़ा है।
पहली पारी मे के० एल० राहुल की शतकीय पारी महत्त्व की रही, जबकि दूसरी पारी मे वे विफल दिखे। पिछल्लू बल्लेबाज़ों के साथ भागीदारी करते हुए, अपने शतक की ओर बढ़ते हुए, विराट कोहली निराशा का शिकार होते हुए, कैच दे बैठे थे; क्योंकि तब तक भारत के ९ खेलाड़ी पैवेलियन लौट चुके थे; विराट का साथ देनेवाला कोई दिख नहीं रहा था।
भारतीय महिला-क्रिकेटदल बनाम ऑस्ट्रेलियाई दल
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भारतीय गेंदबाज़ रेणुका सिंह ठाकुर का प्रदर्शन अति प्रभावकारी था। जेमिमा, पूजा वस्त्रकर तथा यास्तिका के अलावा अन्य भारतीय बल्लेबाज़ असरकारी न दिख सकीं। स्नेह राणा के शानदार कैच के अलावा भारतीय क्षेत्ररक्षण शिथिल रहा। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर की कप्तानी, बल्लेबाज़ी, क्षेत्ररक्षण तथा गेंदबाज़ी बेहद लचर दिख रही थी।
भारतीय दल का क्षेत्ररक्षण बहुत ही निराशाजनक रहा; कई कैच छोड़े गये थे; अनावश्यक रन दिये गये थे। ऑस्ट्रेलिया की ओर से पेरी, लिचफ़ील्ड तथा मैक्ग्रा की बल्लेबाज़ी भारतीय दल पर बहुत भारी दिखी। भारतीय दल ने ५० ओह्वरों मे ८ विकेट पर २८२ रन बनाये थे, जो कम नहीं थे; परन्तु रेणुका के अलावा अन्य कोई भी गेंदबाज़ ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों पर प्रभाव न डाल सकी थीं। इस प्रकार ऑस्ट्रेलियाई दल ने भारतीय कमज़ोरी का लाभ लेते हुए, ४ विकेट खोकर २८५ रन बनाते हुए, उसे ६ विकेटों से पराजित कर, शानदार जीत लेते हुए, मनोवैज्ञानिक लाभ प्राप्त कर लिया है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ दिसम्बर, २०२३ ईसवी।)