युवा प्रतिभा सीतांशु त्रिपाठी का राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ के साथ साक्षात्कार

साक्षात्कार के दौरान सीतांशु ने कहा कि वह एक मशहूर मौत मरना चाहते हैं,

साहित्य के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे सीतांशु अच्छी कविताएं लिखते हैं । इनकी कविताएं देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी खूब पढ़ी और सराही जाती हैं । इनकी कविताओं को भारत के साथ-साथ अमेरिका के हिन्दी समाचार पत्रों में पढ़ सकते है । शीतांशु से जब बातचीत शुरू हुई तो शब्दों को कविताओं का रूप देते हुए उन्होंने कहा कि- 
   “कभी कभी लगता है मुझे ऐसा कि शायद मैं मेरी उम्र से ज्यादा बड़ा हूँ,  
    सबने हमेशा गिराने की ही कोशिश की पर माँ पापा की दुआ से अब तक खड़ा हूँ ।" 

 आइए सीतांशु बातों का सिलसिला बढ़ाते हैं ।

राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- सबसे पहले आप अपने बारे में बताइये।
सीतांशु- मैं सतना जिले के एक छोटे से गांव हिनौती का निवासी हूँ । मेरे पिता जी एक किसान हैं और मैं ऐसे गाँव से हूँ जहाँ आज भी सड़कें नहीं हैं । आज भी लाइट नहीं है और आज भी लोग तालाब का पानी पी कर जीवन यापन करते हैं । छोटी सी जगह का और बहुत ही छोटे और गरीब परिवार का हूँ । पर सपने बहुत बड़े देखे हैं ।
 “दो चार सपने ऐसे हैं जिन्हे आसमां से कहीं दूर चाहता हूँ , 
   जिंदगी भले ही गुमनाम हो मेरे दोस्त पर मौत मशहूर चाहता हूँ”
   ये लाइने कॉमेडी के बादशाह जाकिर खान की हैं और मैं इन पंक्तियों को जीना चाहता हूँ । मेरा जीवन बहुत ही साधारण और संघर्ष पूर्ण रहा है । खुशियों और चैन की नींद से मेरी कभी कुछ खास बनी नहीं । 
2. राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- अभी आप क्या कर रहें है और आगे क्या करना चाहते हैं ?
सीतांशु- अभी-अभी मैंने जे पी यूनिवर्सिटी गुना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म की है । यह मध्यप्रदेश की पहली और सबसे बड़ी प्राइवेट युनिवर्सिटी हैं । हिन्दी मुझे शुरुआत से ही प्रिय है । हिंदी से प्यार तो बचपन से था पर अब ये प्यार इतना बढ़ गया हैं की बस हिंदी पढ़ता हूँ और कविताएँ लिखता हूँ । हजारों-लाखों लोगों का प्यार मिल रहा है और लोगो का दर्द मेरे शब्दों से कम होता है तो बहुत ख़ुशी होती है । एक बुक लिख रहा हूँ जिसका नाम “अधूरा पन्ना” है और एक अच्छा राइटर बनने का सपना है । आगे भी लिखना है, लिखते रहना है, पर न तो आसमान को छूना है और न ही बहुत बड़ा आदमी बनना है । बस लोगों के दिल का बादशाह बनना है ।
3.राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- कविता लिखने की शुरुआत कब और कैसे हुई ? अभी तक कितनी कविताएँ लिखी हैं  ?
सीतांशु- कविता लिखने की शुरुआत कब की कुछ याद नहीं, क्योंकि कागज और कलम से मेरी बचपन से बनती थी । पहले लिखता था फिर सुनाने लगा और लोगो का प्यार मिलता गया मैं बढ़ता गया । समाचार पत्र पढ़ता था तो सोचता था कि क्या कभी ऐसा होगा की सुबह उठूं और पेपर खोलूँ तो मेरी फोटो दिख जाये । आज वो सपना हकीकत में पूरा हो रहा है । 
     “लोग पूछते हैं कि कैसे लिखते हो तुम बताओ न, किस-किस को तुमने पढ़ा हैं,
      कैसे बताऊं मैं उन्हें कि उनके खुदा ने मुझे और मेरी जिंदगी को गमों से गढ़ा है । ”
हजारों कविताएं लिखी हैं जिनमें से बहुतों ने मुझे अलग पहचान दिलाई और कुछ अभी गुमनाम हैं । मेरा उद्देश्य लोगों तक सच को पहुंचाना है और कविताओं के माध्यम से मैं कोशिश कर रहा हूँ । "एक जहर बात पिरिडिअस की, बेटी हैं तो कल है, जस्टिस इन् रेप केस, बाबा ये बेटा-बेटी का फर्क हटाओगे क्या, बदला पुलवामा का, शहीद के भाई को पत्र, रावण अभी मरा नहीं है, मेरा भाई था वो, फिर मुलाकात, एक लड़की थी दीवानी सी, जख्म, हार कर लड़ना सीखो, शर्म करो प्यारे, दहेज़ क्यों, नेता जी घर पर, कालेज वाला प्यार, वो दोस्त, पर्यावरण पर एहसान, एक शाम, अगर मैं मर जाऊँ, सुना है वो बदनाम हो गये, जैसी बहुत सी कविताएँ लिखी हैं ।
4. राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- अपनी खूबियों के बारें में बताइये ।
सीतांशु- मैं किसी भी बात को चाहे वो कितना भी निगेटिव हो उसको पॉजिटिव लेता हूँ । किसी भी रोते हुए को हंसा देता हूँ और किसी के भी गम को अपना बना लेता हूँ । अजनबी वो चाहे कोई कितना भी पल भर में उसको अपना बना लेता हूँ, लोग मुझे डाउन टू अर्थ कहते है और मैं पूरी कोशिश करता हूँ कि मेरी वजह से किसी का कोई नुकसान न हो किसी का दिल न दुखे 
5. राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- अपनी उपलब्धियों के बारे में बताइए?
सीतांशु- मैं आज जो भी हो जैसा भी हूँ सब माँ पापा के आशीर्वाद और लोगों के प्यार की वजह से हूँ । जैसा कि मैंने बताया कि मैं बहुत गरीब परिवार से हूँ तो जे पी यूनिवर्सिटी से जहाँ से पढ़ाई करने की फीस 12 से 15 लाख हैं वहाँ से फ्री में पढ़ाई करना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है । क्योंकि मैं मेधावी छात्र की श्रेणी में था जो मेरे माँ पापा और सरदार पटेल स्कूल की मेहनत का फल था । अपने इंजिनीयरिंग के दिनों में मैंने एक प्रोजेक्ट ऑटोमेटिक डस्टबिन बनाया ये डस्टबिन पूरी तरह टच लेस और इंटरनेट से कनेक्टेड था । हमारा यह प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान के लिए मददगार साबित हुआ । ये भी मेरे लिए उपलब्धि से कम नहीं । मैं उस जगह से हूँ जहाँ आज भी पढने के लिए डेली समाचार पत्र नहीं मिल पाता । आज भी सड़कें नहीं हैं । आज भी लोग बिना लाइट के रहते हैं । ऐसे में जब खुद को दैनिक भास्कर, अमर उजाला, दैनिक सूरज केसरी, विजय दर्पण टाइम्स, राष्ट्रीय नवाचार, एक्शन इंडिया और हम हिंदुस्तानी जैसे राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में देखता और पढ़ता हूँ तो बहुत ख़ुशी होती हैं । जब भारत के साथ-साथ अमेरिका में भी लोग मेरी कविताओं को पढ़ते हैं तो अच्छा लगता है । इस उपलब्धि के लिए कह सकता हूँ कि ये आप सबके प्यार से ही हो पा रहा हैं ।
6. आपका परिवार और आपके रिश्तेदार क्या आपके साथ हैं और आप आज जो भी हैं उसका श्रेय किसको देंगे ?

सीतांशु- “जब-जब लाइफ में मैं खुद से या दुनिया से हारा 
      और ऐसा लगा कि नहीं है अब किसी का सहारा तब-तब मेरे माँ-पापा, नाना-नानी और मामा-मामी ने कहा 
      बेटा एक बार कोशिश करो दोबाराहर वक्त मेरे साथ अंधे की लाठी बनके खड़े रहते हैं 
      मेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी ये कर सकते हैं । 
      हर रोज यही दुआ करता हूँ मैं खुदा से    
      कि हर किसी को दे वो परिवार इतना खूबसूरत और प्यारा
आज मैं जो भी हूँ जहाँ भी हूँ मेरे माँ-पापा के सपोर्ट की वजह से और उनके आशीर्वाद से हूँ । शायद मैं बहुत पहले गायब हो गया होता या कहीं गुम गया होता । आज यहां तक नहीं आ पाता । पर मेरे नाना-नानी और मामा-मामी ने हमेशा साथ दिया । मैं अभी इस काबिल नही हूँ की उनका शुक्रिया अदा कर पाऊं । इनके अलावा मेरे दोस्तों का सरदार पटेल स्कूल का और जे पी ग्रुप का भी मैं ऋणी हूँ ।
7. राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- क्या आप सफ़ल हो गये हैं ? आपकी नज़र में सक्सेज शब्द का क्या मतलब हैं ?
सीतांशु- जी बिल्कुल नही ! मैं अभी सक्सेसफुल नहीं हुआ हूँ । बहुत कुछ करना हैं और बहुत से लोगों का एहसान है मुझ पर उन सबके लिए कुछ कुछ करना है ।
सुन अँधेरे तू खुश मत हो दीपक का जलना अभी बाकी है,
    मेरे ख्वाबों ने चलना शुरू किया मेरा चलना अभी बाकी हैअभी-अभी तो नींद खुली है पर रात कई जगना अभी बाकी है,
    आसमां की मैं क्या बात करूँ धरती पर ढंग से चलना अभी बाकी हैं ।"
सक्सेज का मतलब आपको वो सब कुछ मिल गया है जो आपको चाहिए था । अब आपको कुछ नहीं चाहिए । पर मै अभी सफ़ल नहीं हूँ क्योंकि मैं अभी चलना सीख रहा हूँ । इसको सक्सेज तो नहीं कह सकते । पर मेरा दिल कहता हैं कि इसी तरह लोगों का प्यार और आशीर्वाद मिलता रहा तो एक दिन जरूर मेरा सपना पूरा होगा ।
8. राघवेन्द्र कुमार 'राघव'- बहुत से लोग हैं जो सपने देखते हैं पर पूरा नहीं कर पाते । उनके लिए आप क्या कहना चाहेगे ?
सीतांशु- हाँ सपने सब देखते हैं और बहुत बड़े-बड़े सपने देखते हैं । कुछ लोगों के पूरे होते हैं तो कुछ के नहीं । पर बड़ी बात ये हैं कि सपने देखते रहना चाहिए और उनको पूरे करने की कोशिश करनी चाहिए । कई बार आप हार जाओगे पर एक दिन ज़रूर जीतोगे । कहते हैं कि कोई भी इंसान एक दिन में सक्सेज नहीं पाता पर एक दिन जरूर सक्सेसफुल होता हैं । हार नहीं माननी चाहिए और कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि मैं ये नहीं कर सकता । क्योंकि जिसने किया है वो भी हमारी तरह ही था ।