देव और मानव बनने के लिए प्रेम और न्याय का धर्म

प्रश्न:-
हमारे धर्मशास्त्रों में नर और नारायण का वर्णन है, नारायण तो स्वयं भगवान विष्णु हैं तो नर कौन है ..?
साधारण बोलचाल की भाषा में नारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
तो नारी का क्या अर्थ हुआ?

उत्तर:-
नर्क में रहने वाले मनुष्यों को नर और नारी कहते हैं।
नर्क से नर-नारियों का उद्धार करने वाले देवता को नारायण कहते हैं।
असत्य, घृणा, अन्याय व पाप की जीवनधारा को ही नर्क कहते हैं।
असत्य, घृणा, अन्याय व पापवादी लोग ही पंचपाप और पंचदोष से घिर जाते हैं इसी से उनका जीवन नारकीय हो जाता है।

भगवान विष्णु ही कर्मफल का न्यायसिद्धांत सिखाकर इन पापियों को नरक से निकाल कर न्यायप्रिय मानव बनाते हैं इसीलिए भगवान विष्णु को ही धर्मशास्त्रों में नारायण कहा गया है।

संस्कृत की नृ धातु से नारायण, नर, नारी, नर्क आदि शब्द बने हैं।
जलीयता लिप्सा कीचड़ भ्रम अज्ञान माया झूठ और अन्याय और पॉप के कीचड़ में फँसने या लिप्त होने के भावार्थ में नृ धातु प्रयुक्त होती है।

देव और मानव बनने के लिए प्रेम और न्याय का धर्म अपनाना पड़ता है।
नर्क में तो पुण्य से ऊपर का धर्म किसी को पसंद ही नहीं आता।
इसीलिए सब नर या नारी ही हैं अभी दुनिया में।

✍️???????? (राम गुप्ता, स्वतंत्र पत्रकार, नोएडा)