भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का जो चिर-परिचित अभियान ‘अपनी भाषा सुधारें’ कोरोना-दुष्प्रभाव के कारण थम गया था, अब उसे गति मिल चुकी है। वे अपने अभियान का आरम्भ मथुरा से करेंगे, जो दमोह तथा सागर (म०प्र०) तक लगातार जारी रहेगा। वे ‘ज़िला शिक्षा और प्रशिक्षण-संस्थान’ (डाइट), मथुरा (उत्तरप्रदेश) में आयोजित त्रिदिवसीय (१६-१७-१८ दिसम्बर) भाषिक कर्मशाला का उद्घाटन करने के पश्चात् प्रथम दिन ध्वनि, शब्द, वाक्य, कर्त्ता, क्रिया, कर्म, पुरुष, लिंग, कारक, उपसर्ग, धातु, प्रत्यय, वर्तनी, विरामचिह्न, शुद्धाशुद्ध शब्द-विचार, वाक्य-विन्यास आदिक व्याकरणिक अंग-उपांगों को वहाँ के अध्यापक-अध्यापिकाओं और विद्यार्थियों को समझायेंगे। आयोजन के दूसरे दिन सामान्य हिन्दी/ हिन्दी-भाषा के संरचनात्मक पक्षों पर बहुविध प्रकाश डालेंगे; तदनन्तर विद्यार्थियों-अध्यापक-अध्यापिकाओं के प्रश्नों-प्रतिप्रश्नों के उत्तर-प्रत्युत्तर देंगे। तीसरे और अन्तिम दिन पहले और दूसरे दिन बताये-समझाये गये पाठों की पुनरावृत्ति करते हुए, वे प्रशिक्षणार्थियों से प्रश्न करेंगे; साथ ही प्रशिक्षणार्थी-संसद् को व्यावहारिक रूप देंगे।उनके प्रशिक्षण का ‘यू ट्यूब’ के माध्यम से देशव्यापी जीवन्त प्रसारण भी किया जायेगा। उसके बाद आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का अगला सारस्वत प्रवास शासकीय स्नातक महाविद्यालय, हटा, दमोह (मध्यप्रदेश) होगा, जहाँ वे २१-२२ दिसम्बर तक आयोजित ‘शिक्षण-प्रशिक्षण में मौखिक और लिखित भाषाओं की उपयोगिता और महत्ता’ विषयक कर्मशाला का उद्घाटन करने के बाद वहाँ शब्द-सर्जन कराते हुए शब्दलोक की व्याकरणिक परिक्रमा करायेंगे तथा दूसरे और अन्तिम दिन प्रशिक्षणार्थियों को ‘प्रयोजन मूलक हिन्दी के सन्दर्भ में मीडिया-लेखन और संरचना’ को समझायेंगे। वे २३ दिसम्बर को शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गढ़ाकोटा, सागर (मध्यप्रदेश) में आयोजित एकदिवसीय भाषा और पत्रकारिता-कर्मशाला का उद्घाटन करने के पश्चात् विद्यार्थियों और अध्यापकवृन्द के मध्य ‘पत्रकारिता में भाषिक और सामाचारिक महत्त्व’ का विवेचन और विश्लेषण करेंगे।
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