सन्त समीर (वरिष्ठ पत्रकार/गांधीवादी चिन्तक)

चारों तरफ़ हाहाकार वाली स्थिति है, फिर भी विशेषज्ञ उल्टी सलाहें देने में लगे हैं। सबका एक ही रट्टा है कि मास्क लगाओ, घर से बाहर मत निकलो। ये दोनों ही ख़तरनाक काम हैं। दिन-रात करोना मरीज़ों में उलझा हुआ हूँ, अन्यथा फुरसत मिले तो लिखूँ कि कैसे इन्हीं दोनों चीज़ों की वजह से दूसरी लहर ज़्यादा ख़तरनाक हुई है। मेरे पास ऐसे-ऐसे सङ्क्रमितों के फ़ोन आए हैं, जिन्हें ऐसी हिदायतों के पालन के लिए पुरस्कार दिया जा सकता है। एक सज्जन तो कोरोना से बचे रहने के लिए साल भर से न के बराबर घर से बाहर निकले; ज़रा देर के लिए बाहर गए तो मुस्तैदी से मास्क लगाया; पर अब आश्चर्य में हैं कि आख़िर वे कोरोना की चपेट में कैसे आ गए! असल में इन दोनों कामों ने बीते साल भर में देश के नौजवानों तक को प्रकृति के दो सबसे असरदार वायरस व बैक्टीरियारोधी उपादानों, सूरज की रोशनी और खुली साफ़ हवा, से दूर रखा और उनकी इम्युनिटी में पलीता लगाने का काम किया। पहली लहर में बूढ़े लोग परेशान हुए, पर साल भर में हमने नौजवानों को भी शारीरिक गतिविधियों से दूर करके उन्हें बूढ़ों-जैसा बना दिया, तो अब वायरस के निशाने पर वे भी आसानी से आ गए हैं।
ख़ैर, अभी हाल की ज़रूरत लोगों को सङ्क्रमण से बचाने और उबारने की है तो मैं कुछ नुस्ख़े लिख रहा हूँ। इन्हें आज़मा सकते हैं। यों, होम्योपैथी में मैं कॉम्बिनेशन-जैसी चीज़ों से परहेज़ करता हूँ और बिना विधिवत् प्रूविङ्ग के इनका समर्थन नहीं करता, पर अभी का हाल यह है कि मरीज़ न तो अपने पूरे लक्षण समझा पा रहा है और न ही डॉक्टर उसके पास जाकर सही स्थिति जान पा रहा है। ऐसे में, जो लोग ठीक हैं और बचे रहना चाहते हैं तथा जो लोग सङ्क्रमित हो चुके हैं और बुख़ार, सर्दी-ज़ुकाम-खाँसी, बदन दर्द वग़ैरह से पीड़ित हैं, दोनों ही इन नुस्ख़ों का प्रयोग कर सकते हैं।
नुस्ख़ा—1
पहला काम कीजिए कि खाने में सलाद की मात्रा बढ़ा दीजिए। शाम का खाना आठ बजे से पहले कीजिए और दोनों समय खीरा, ककड़ी, टमाटर वग़ैरह का चार-पाँच सौ ग्राम तक भरपूर सलाद खाइए। टमाटर ज़रूर रहे। नींबू-पानी-शहद दिन में दो-तीन बार ले सकते हैं। दालचीनी, मुलहठी, लौङ्ग, काली मिर्च वग़ैरह वाला गर्म काढ़ा दिन में दो से तीन बार पीजिए। सवेरे ख़ाली पेट दो चम्मच कच्ची हल्दी या आधा चम्मच सूखी हल्दी का चूर्ण गर्म पानी से दवा मानकर नियमित लीजिए। होम्योपैथी की अश्वगन्धा मदर टिञ्चर भी चौथाई कप पानी में दस-दस बूँद टपकाकर नियमित ले सकते हैं। दिन में दो बार गर्म पानी में हल्दी और सेंधा नमक मिलाकर गरारा करें, रात में सोने से पहले एक बार ज़रूर। बिना किसी ख़ास दवा के बचाव का यह बेहतर उपाय है।
नुस्ख़ा—2
Aconite-200
Arsenicum Album-200
Belladona-200
China-200
Eupatorium Perf-200
इन दवाओं को दस-दस मिनट के अन्तर पर दो-दो बूँद जीभ पर टपकाना है। सवेरे-दोपहर-शाम दिन में तीन बार ऐसा कीजिए। हफ़्ते भर बाद फिर इसी तरह लीजिए। याद रखें कि इस समय के लक्षण केवल एक दवा के पूरे लक्षणों से मेल नहीं खा रहे हैं, इसलिए केवल आर्सेनिक या केवल एकोनाइट वग़ैरह से बात नहीं बनेगी। इतना ध्यान रखें कि जो लोग सङ्क्रमणग्रस्त हैं, वे इस नुस्ख़े में पोटेंसी 200 के बजाय 30 प्रयोग करें और दवाओं को रोज़ ही सवेरे-दोपहर-शाम लें। ठीक होने पर दवा बन्द कर दें।
नुस्ख़ा–3
सङ्क्रमणग्रस्त और सर्दी-ज़ुकाम-खाँसी, बुख़ार और बदन दर्द से पीड़ित लोग बेहतर है कि सबसे पहले होम्योपैथी ‘बी-जैन कम्पनी’ की Omeo Flu दवा दिन में चार बार दो-दो गोली जीभ पर रखकर चूसें। इससे आराम न मिले तो ही ऊपर वाला नुस्ख़ा आज़माएँ। एक साथ दोनों नुस्ख़े प्रयोग नहीं करने हैं। इनमें से कोई भी नुस्ख़ा आज़माने के साथ-साथ आप बायोकैमी दवाएँ ले सकते हैं। Ferrum Phos-6X, Kali Mur-6X, Natrum Mur-6X की पाँच-पाँच गोलियाँ एक कप गुनगुने पानी में घोल लीजिए। कप को प्लेट वग़ैरह से ढँककर रखिए, ताकि उसमें हवा न जाए। दो-दो चम्मच पानी तीन-तीन घण्टे पर लेते रहें। बुख़ार ज़्यादा हो ते शुरू में दवा 15-15 मिनट पर भी ले सकते हैं। आराम मिलते ही समयान्तराल बढ़ा दीजिए। अगर ऊपर के नुस्ख़ा–1 के साथ इसे प्रयोग करना हो तो दोनों के बीच एकाध घण्टे का अन्तर ज़रूर रखें। तीन-चार दिन में आप ठीक हो सकते हैं। कई लोगों को शरीर में दर्द की शिकायत रहती है। अगर ऐसे दर्द में दबाने पर आराम लगे तो Mag Phos-6X की पाँच गोली इसी में मिलाकर या चार-चार गोली अलग से दिन में तीन-चार बार जीभ पर रखकर चूसें।
नुस्खा—4
स्वामी रामदेव की कोरोनिल दवा इन नुस्ख़ों के साथ आप बेहिचक प्रयोग कर सकते हैं।
नुस्ख़ा—5
जो लोग ठीक होने के बाद लगातार चलने वाली खाँसी से हलकान हैं, वे होम्योपैथी दवा Amon Carb-200 की दो-तीन बूँद एक बार जीभ पर टपका सकते हैं। सिर्फ़ एक बार।
सबसे ज़रूरी बात—
डर इतना व्यापक है कि सङ्क्रमण का पता चलते ही एक गड़बड़ लोग अक्सर कर रहे हैं। सबके घरों में पैरासीटामाल, क्रोसीन, डोला वग़ैरह रखी होती हैं। डॉक्टर भी यही बताते हैं। एलोपैथी के हिसाब से कोरोना की दवा के अभाव में यही सबसे सुरक्षित तरीक़ा है, पर ख़तरा वास्तव में यहीं से शुरू हो जाता है। इन दवाओं को लेने के बाद एक-दो दिन के लिए तो राहत मिलती है, पर बुख़ार दुबारा चढ़ता है तो सवार ही हो जाता है और जाने का नाम नहीं लेता। जाता भी है तो खाँसी या साँस फूलने का परेशान करने वाला तोहफ़ा दे जाता है। करना तो यह चाहिए कि आप पैरासीटामाल वग़ैरह लेने के बजाय एक दो दिन के लिए नारियल-पानी और मुसम्मी या नींबू-पानी-शहद पर रह जाएँ। बुख़ार 102 डिग्री से ऊपर हो तो माथे और पैर पर ठण्डे पानी की पट्टी रखकर इसे नीचे लाने का इन्तज़ाम करें। दूसरे दिन हल्का खाना भी खाएँ तो खाने से पहले ख़ूब सलाद खाएँ, चार-पाँच सौ ग्राम तक। इन दिनों खीरा, टमाटर आसानी से उपलब्ध हैं। इस तरीक़े से अगर आप तीन-चार या पाँच दिन में ठीक होंगे, तो एलौपैथी खाने के बाद दस-पन्द्रह दिन या कभी-कभी महीने भर के लिए भी बिस्तर की शोभा बढ़ाते रह सकते हैं। कोई भी विशेष लक्षण दिखाई दे तो अपने पड़ोसी किसी अच्छे होम्योपैथ से मिलिए, यक़ीन मानिए आप बेहतर ढङ्ग से अपनी सुरक्षा कर पाएँगे। मेरा स्पष्ट अनुभव है कि इस महामारी में एलोपैथी से कई गुना ज़्यादा होम्योपैथी और नेचुरोपैथी कारगर हैं। मुनाफ़ाखोर धन्धेबाज़ों ने हमारी सरकार को मूर्ख बनाया और हमारी कर्मठ सरकार ने बड़ी मुस्तैदी से उन पद्धतियों पर ही रोक लगा दी, जिनके ज़रिये आसानी से इलाज सम्भव था। सही कहा जाय तो एलोपैथी की कोई दवा बिना खिलाए मरीज़ को अगर होम्योपैथी और नेचुरोपैथी में भेज दिया जाय तो एक भी मरीज़ को जान से हाथ नहीं धोना पड़ेगा।
नोट– एक बार में समझ में न आए तो कृपया दुबारा ध्यान से पढ़ें और जैसा लिखा है, वैसा ही करें। होम्योपैथी को एलोपैथी अन्दाज़ में न अपनाएँ। ध्यान रखें कि दवा लेने के कम-से-कम आधा घण्टा पहले और आधा घण्टा बाद तक पानी के अलावा कुछ भी खाना-पीना नहीं है।