एक सवाल जनता के नाम

हे हिन्दुओं…!
हे मुसलमानो..!!
हे ईसाइयों, बहाईयों, जैनो, बौद्धों…!!!
हे दुनिया के सारे धर्म के अनुयाइयों…!
क्या तुम्हारे गुरुओं, आकाओं, मालिकों, नेताओं के पास तुम्हें शिक्षा देने की, तुम्हें रोजगार देने की, तुम्हें सुखसुविधा देने की, तुम्हें संरक्षण देने की कोई योजना है..??
हजारों सालों से तुम उनके पीछे भाग रहे हो !
क्या उन्होंने कभी उन चारों मुद्दों पर न्यायपूर्वक कुछ किया…??
क्या किसी भी धर्म के मुखिया ने कभी अपने अनुयायियों के लिए समुचित रूप से निःशुल्क शिक्षा, रोजगार, सुखसुविधा एवं संरक्षण के लिए कोई न्यायसंगत आवाज उठाई है..???
नहीं कभी नहीं..!!
हरेक धर्म ने केवल दान-पुण्य की ही बात कही है..!!
केवल मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा आदि बनवाने के लिए कहा है, और इसी की रक्षा के लिए लड़ने को कहा है..!!

हे कॉंग्रेसियों..!
हे भाजपाइयों…!!
हे कम्युनिस्टों,सपाइयों, भाकपाइयों आदि हरेक राजनैतिक संगठन के अनुयायीयों तुम से भी एक ही सवाल है…!!!
क्या देश की आज़ादी के बाद 75 सालों में तुम्हारी कोई भी सरकार ने तुम्हें न्यायपूर्वक समुचित शिक्षा, रोजगार, सुखसुविधा एवं संरक्षण दिया ??
चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाले नेताओं ने क्या चुनाव जीतने के बाद अपना वादा न्यायपूर्वक निभाया…??
क्या वोट माँगने के लिए हाथ जोड़ने वाले नेताओं ने तुम्हारी मुसीबतों में कभी न्यायपूर्वक तुम्हारा हाथ थामा…??

अगर उपरोक्त न्यायशील जनाधिकार दिया होता तो हरेक धर्म के हरेक राजनैतिक संगठन के 70% से अधिक लोग अशिक्षा ,बेरोज़गारी, असुविधा व असुरक्षा में जिन्दगी नहीं जी रहे होते…!!
गुरु या नेता तो पिता के समान होते हैं !
क्या उन्होंने अपनी-अपनी संतानों की समुचित परवरिश किया..???
छोड़ दो चाटुकारिता…!!
जागो…!
उठो…..!!
अपनी अधिकारों की प्राप्ति के लिए कुछ करो…!

राम गुप्ता, स्वतंत्र पत्रकार, नोएडा