डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
आज देश में कितने बुद्धिजीवी हैं, जो हमारे राष्ट्र के भविष्य ‘युवावर्ग’ को भटकाव की राह पर जाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं; उसकी अवसाद और हताशा की स्थिति में ‘मुक्त मीडिया’ (सोसल मीडिया) के माध्यम से उसेे सकारात्मक दिशा देने के प्रति कटिबद्ध रहते हैं?
आज देश में मतिभ्रम और संकट-संत्रासपूर्ण जीवन जी रहीं युवक-युवतियों को एक निरापद (सुरक्षित) आश्वासन के साथ उनके सुखमय भविष्य का आह्वान करने की आवश्यकता है; क्योंकि राष्ट्रीयता की धुरी को अनवरत चलते रहने में हमारी युवाशक्ति की महती भूमिका रही है, बावुजूद (बावजूद अशुद्ध है।) उसकी उपेक्षा की जाती रही है।
इतिहास साक्षी है कि आज़ादी के बाद से अब तक लगातार युवावर्ग का ‘राजनीतिक इस्तेमाल’ किया जाता रहा है और बदले में दो-चार टुकड़े फेंक दिये जाते रहे हैं। बेशक, इससे उसकी तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति तो हो सकती है; किन्तु उसका स्थायित्व नहीं रहता। यही कारण है कि उसकी भविष्य की दशा-दिशा ‘अन्यथागामिनी’ सिद्ध होती आ रही है।
आइए! इस पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० नवम्बर, २०१९ ईसवी)