आकांक्षा मिश्रा, गोंडा उत्तरप्रदेश

तुम्हारी रचना सबसे
सुंदर है ,
उसमें प्रकृति का भास है
मधुर संगीत ,
सुनहरी धूप
सतरंगी छटाएं सबको आशा की
किरण से जगाती है।
प्रकृति से हमे रूप-रंग
सौंदर्य शौर्य मिला
यही आत्मविश्वास चलना सिखाती है
नदियों की धारा पवित्र होने का एहसास
हमे एक दूसरे से जुड़ना सिखाती है ।
दो किनारों में बसे प्रकृति की सुंदरता
मन मोहती हुई एक दूसरे के सुख -दुख से
परिचित कराती है ।
भूमि की उजली ,चिकनी ,भूरी ,काली मिट्टी
हमे जीना सिखाती है
घने -घने जंगलों में फल -फूलों से बसे प्रकृति के
कण में पोषित करती हुई जीवन की
कठिनाइयों से उबरना सिखाती है ।
तुम्हारी रचना सबसे
सुंदर है
प्रकृति का भास कराती है ।