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कलियुग का भगवान

मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं
मैं जल्द ही आ रहा हूं
कलियुग में अपनी माया रचने
अपनी मनमोहक सी लिए
इस छलिया रूपी संसार को छलने
मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं…….
मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्द ही आ रहा हूं
द्वापर में तो एक ही रावण था
लेकिन अब तो हर घर में रावण ही रावण है
कितनी सीता जैसी नारी को मैं बचाता
कितनों को एक-एक करके मार पाता
बस इसी कारण मैं अपना रूप विराट किए आ रहा हूं
मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्द ही आ रहा हूं…..तुम कहते हो कि मेरा जन्म चीन में हुआ
मैं पला बढ़ा हुआ अमेरिका में
लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है
यही भ्रम तो कंस को भी था
कि कृष्ण का जन्म देवकी के कोख से हुआ
लेकिन वह मेरा जन्म नहीं एक अवतार था
उसी तरह मैं कलयुग में दसवां कल्कि अवतार हो गया हूं
बिना चक्र सुदर्शन के ही आ रहा हूं ……..
मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्दी आ रहा हूं…..
द्रोपदी जैसी हर एक नारी का हो रहा वस्त्रहरण
पता नहीं कितने दुर्योधन ने जन्म ले लिया है
हर एक दुर्योधनों को मिटाने
मैं फिर से एक महाभारत रचाने आ रहा हूं …….
मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्द ही आ रहा हूं……
फिर से कंस रूपी मानव का राज पृथ्वी पर हो रहा है
जिस मानव को प्रखर बुद्धि बल व शक्ति दी
वही दानव वन मानवता का विनाश कर रहा है
कंस के पाप से पीड़ित कई मायावी राक्षसों का वध कर हर एक बेटी के बाप को बेड़ियों से मुक्त कराने आ रहा हूं
मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्द ही आ रहा हूँँ…
ना कोई गरीब ना ही कोई अमीर होगा
ना कोई मंत्री ना ही कोई प्रधानमंत्री होगा
इतिहास के हर एक पन्ने में मेरा नाम होगा
हर किसी को एक ही न्याय देने
मैं आ रहा हूं ……
मैं आ रहा हूं मैं कलियुग का भगवान
कोरोना बोल रहा हूं मैं जल्द ही आ रहा हूं आ रहा हूं….

—–प्रांशुल त्रिपाठी