कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी
हिन्दी आन है हमारी शान है।
हिन्दी हम सबकी पहचान है।।
हिन्दी में गीता और कुरान है।
हिन्दी ही हम सबकी जान है।।
हिन्दी का रखना हमें ध्यान है।
हिन्दी में ही लेना हमें ज्ञान है।।
हिन्दी लाखों तरह की खान है।
हिन्दी से बने सभी विद्वान है।।
हिन्दी के लेखक बड़े महान है।
हिन्दी के शब्दों में ही जान है।।
हिन्दी का करना सदा सम्मान है।
हिन्दी भारतीयों का अभिमान है।।