जब-जब गलत हुआ धरती पर
आयी माता तुम बारम्बार ।
फिर से कष्ट एक आन पड़ा है
आ जाओ फिर से इक बार ।
माता करो जग का उद्धार ।
देखो मानव फिर त्रस्त हुआ है,
बहुत हो रहा अत्याचार ।
देखो अब तो पाप हो रहा
एक ही दिन में लाखों बार ।
माता करो जग का उद्धार ।
जब मानवता पर दुख बरपा है
कष्ट हरे तूने हर बार ।
फिर से माते कष्ट हरो और आशीष तुम देना अपरंपार ।
माता करो जग का उद्धार ।
– सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, संपर्क- 8800416537