— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
भगत सिंह!
नोटों पर तुम्हारी फ़ोटो
चस्पा नहीं हुई।
मत भूलो!
यह तुम पर मेहरबानी की गयी है
वरना मुन्नीबाई के कोठे पर
जिस्म के बदले
तुम्हारा भी सौदा किया जाता;
मैख़ाने में
मैकश के हाथों उछाले जाते
और देश के ग़द्दारों के हाथों
नक़्ली नोटों में शुमार होकर
अपनी पहचान भूल जाते।
अपनी शहादत भूलकर
शुक्रिया करो मेरे दोस्त!
देश के कर्णधारों का।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ११ अक्तूबर, २०२० ईसवी।)