तुम अपने मे, मै अपने मे मस्त हूँ
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — तुम्हारे पास कमी है वक़्त की,और मैं ख़ुद में बहुत व्यस्त हूँ।हमारे रास्ते कभी एक नहीं हुएतुम अपने में, मैं अपने में मस्त हूँ।जानिबेमंज़िल जाते टकरा गये तोबात होगी, क्या […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — तुम्हारे पास कमी है वक़्त की,और मैं ख़ुद में बहुत व्यस्त हूँ।हमारे रास्ते कभी एक नहीं हुएतुम अपने में, मैं अपने में मस्त हूँ।जानिबेमंज़िल जाते टकरा गये तोबात होगी, क्या […]
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मुलाकात की। यह मुलाकात बेयरबॉक की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई, जिसमें वैश्विक […]
लखनऊ: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के निराला सभागार में मंगलवार को प्रख्यात साहित्यकार पं. गगन लाल जी की 109वीं जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के […]
आयुर्वेदाचार्य डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आज के समय में दाँतों से जुड़ी समस्याएँ—जैसे दाँतों में सड़न (कैविटी), मसूड़ों की सूजन, बदबूदार साँस, संवेदनशीलता, प्लाक, और पायरिया (मसूड़ों की बीमारी)—बहुत आम हो चुकी हैं। बदलती जीवनशैली, […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वादा करके मैं मुकरा,अब जीना भारी लगता है।कैसे आँख मिलाऊँ मैं,जीना गद्दारी लगता है।तुम मानो या ना मानो ये,तुम बिन जीना मुश्किल है।साँसें भी कोस रही हमको,लगता पहाड़ सा पल-पल है।मन […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समाज के भीतर उपस्थित विकृतियों को दूर किए बिना केवल दोषारोपण या छिद्रान्वेषण में लगे रहना किसी भी राष्ट्र के लिए हितकारी नहीं हो सकता। जब हम समस्याओं के मूल कारणों […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संस्कृति और कला के अभाव में मानव-जीवन निस्सार हो जाता है। रचनात्मकता केवल मनुष्य को प्राप्त वह दिव्य क्षमता है जो उसे अन्य प्राणियों से अलग करती है। यही रचनात्मकता हमारी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– विद्या परमं धनम् ! यह केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है। धन, पद, यश और वैभव समय के साथ बदलते रहते हैं, परंतु ज्ञान वह संपदा है […]
आज (२२ अप्रैल) ‘विश्व-पृथ्वीदिवस’ है। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ अप्रैल, २०२६ ईसवी।)
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में संध्या उतर चुकी थी। वटवृक्ष के नीचे बैठे सुधांशु की आँखें बंद थीं। आचार्य के शब्द उसके भीतर मर्मस्थान को वेध रहे थे। वास्तव मे ये विचार अब परिपक्व […]
नैरोबी। केन्या के नैरोबी में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थायी प्रतिनिधियों की समिति की 173वीं बैठक में भारत ने अपना राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। केन्या में भारतीय उच्चायुक्त और यूएनईपी में भारत […]
इन दिनो निजी शिक्षण-संस्थाओँ मे मनमाने तरीक़े से शुल्क-वृद्धि, पुस्तक, उत्तरपुस्तिकाओँ, गणवेश (यूनिफ़ार्म) आदिक के मूल्योँ मे जिस तरह से अप्रत्याशित वृद्धि की जा रही है; साथ ही यह बाध्यता कि उपर्युक्त सामग्री सम्बन्धित शिक्षण-संस्थाओँ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल मे सूर्य की बाल किरणें जब धरती को स्पर्श कर रही थीं, उसी समय सुधांशु आश्रम के प्रांगण में खड़ा था। वह स्थान जहाँ से उसकी यात्रा आरम्भ हुई थी— […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का दूसरा प्रहर था। आकाश में चंद्रमा शांत था, और उसकी चाँदनी धरती पर एक कोमल श्वेत आभा बिखेर रही थी। हवेली के पीछे वही उपवन—जहाँ कुछ समय पूर्व प्रेम […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]
तुम्हारे पास कमी है वक्त की और मै खुद मे ही बहुत व्यस्त हूँ।हमारे रास्ते कभी एक नहीं तुम अपने मे और मैं अपने मे मस्त हूँ।जानिबे मंज़िल जाते कभी टकरा गये तो बात होगी […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव समाज की एक जटिल सच्चाई यह है कि संसार का कोई भी देश, कोई भी संस्कृति, कोई भी मत या सम्प्रदाय ऐसा नहीं है जहाँ किसी न किसी रूप में […]
Dr. Satyam Kulshrestha, a Lecturer of Lucknow Public School (C.P. SINGH) , was awarded the “Lucknow Gaurav Ratna 2026” by the Honorable Deputy Chief Minister, Mr. Brijesh Pathak, at a ceremony held at the Uttar […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर की शीतलता अभी पूर्णतः विलीन नहीं हुई थी। मंदिर से लौटते समय सुधांशु के भीतर एक अद्भुत शांति थी, पर उसी के साथ एक नया प्रश्न भी जन्म ले चुका […]
अब कथा उस रहस्य के द्वार पर पहुँचती है जहाँ पाठक और साधक—दोनों के भीतर एक ही प्रश्न उठता है— “यह रहस्यमयी संन्यासी वास्तव में कौन है?” इसी रहस्य को धीरे-धीरे उद्घाटित करते हुए, गहन […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का अंतिम प्रहर… आकाश गहन अंधकार में डूबा था, पर उस अंधकार के भीतर एक अदृश्य प्रकाश छिपा हुआ था—जैसे सृष्टि स्वयं किसी महान परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही हो। […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– राहेइश्क़ मे पाने से ज़्यादा लोग खोते हैं।इस रिवाजेइश्क का मारा हुआ हूँ मै।राह-ए-इश्क़ चलकर ख़ुद को जला दिया।चौसर-ए-इश्क़ की बाजी हारा हुआ हूँ मै।इश्क़ के सितम की इन्तहा देखने निकला […]
राहुल सांकृत्यायन के जन्म-दिनांक ९ अप्रैल पर विशेष प्रस्तुति प्रयागराज। विश्व के महानुभवी राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिनांक ९ अप्रैल की पूर्व-संध्या मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक राष्ट्रस्तरीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन ‘सारस्वत […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]
नई दिल्ली। भारत-अफ्रीका संबंधों पर विदेश मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की। बैठक में व्यापार एवं निवेश, सुरक्षा, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग में बढ़ते […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav We learn through play.Never engage in a fray. To school we all go, day after day.Teachers impart wisdom in own way. Homework given, we do with care.Daily tasks, we complete with […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात गहरी हो चुकी थी। हवेली के चारों ओर फैली शांति में केवल कभी-कभी पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी। दूर खेतों में जलती हुई मशालों की लौ हवा के साथ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के क्षितिज में विलीन हो रहा था और आकाश में हल्की सुनहरी आभा फैल रही थी। हवेली के प्रांगण में एक विचित्र शान्ति थी, […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In the landscape of Indian governance, the promise of universal, free education stands as a flagship ideal. On paper, the Right to Education (RTE) Act of 2009 was supposed to be […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]
● आयोजक :– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो संयुक्त राज्य अमेरिका के उकसावे मे आकर इस्राइल ने अकस्मात् ईरान पर आक्रमण करके जो जघन्य कृत्य किया है, उसकी प्रतिक्रिया मे ईरान की ओर से […]