दुर्दान्त अपराधी विकास दुबे के आतंक से पुलिस दहली!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

● कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या; अनेक गम्भीर रूप से घायल।

घटना २ जुलाई के मध्य रात्रि की है, जो ३ जुलाई तक चलता रहा। मुख़बिर से विश्वस्त सूचना मिली थी कि विकास दुबे चौबेपुर थानान्तर्गत अपने गाँव बिकरू-स्थित घर में है। इस पर बिठूर और चौबेपुर के पुलिसबल ने उसे गिरिफ़्तार करने के लिए योजना बना ली थी। कुछ देर बाद मध्यरात्रि में पुलिसबल विकास के गाँव की ओर रवाना हो गयी थी; परन्तु उसकी सूचना पहले ही विकास दुबे तक पहुँच चुकी थी। उसने रास्ते में जे०सी०बी० लगवाकर मार्ग अवरुद्ध करा दिया था। सभी घटनाक्रम की रौशनी में यह तथ्य सुस्पष्ट हो रहा है कि विकास दुबे ने पुलिस के साथ “दो-दो हाथ” करने का मन बना लिया था। यही कारण है कि वह और उसके साथ के लगभग ५० अपराधियों ने छत पर से अत्याधुनिक शस्त्रास्त्रों से पुलिसबल पर हमला बोल दिया था।

विकास दुबे ने आपराधिक जगत् में उस समय क़दम रखा था, जिस समय नवादा गाँव में उसने चौधरियों के साथ मारपीट की थी। ज्ञातव्य है कि विकास दुबे पहले ‘बहुजन समाज पार्टी’ के साथ जुड़ा था। यही कारण था कि उसने किसी विषय पर वर्ष २००० में शिवनी-थानान्तर्गत ताराचन्द्र इण्टर कॉलेज के सहायक प्रबन्धक सिद्धेश्वर पाण्डेय की उसी विद्यालय में ही हत्या कर दी थी और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं के हस्तक्षेप के कारण उसे पुलिस से बचा लिया गया। उसका मनोबल बढ़ता रहा और उसने वर्ष २००१ में अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए थाने में घुसकर भारतीय जनता पार्टी के नेता सन्तोष शुक्ल को जान से मार डाला था; परन्तु उसे तत्कालीन सत्तासीन नेताओं ने उसे बचा लिया था। वर्ष २००४ में उसने एक केबिल-व्यवसायी दिनेश दुबे और वर्ष २०१३ में एक अन्य व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं, उस हत्यारे ने वर्ष २०१८ में अपने चचेरे भाई अनुराग पर प्राणघातक हमला किया था।

हत्यारा ‘भारतीय जनता पार्टी’ से सम्बद्ध बताया जा रहा है। विकास दुबे ने सी०ओ० को अपने घर के कमरे में घसीट कर सिर पर गोली मारी थी।

पुलिस विकास दुबे को गिरिफ़्तार करने के लिए गयी थी। ऐसे में, महत्त्वपूर्ण प्रश्न है– पुलिसबल के उसके घर जाने की ख़बर किसने दी थी? उसे गिरिफ़्तार करने की रणनीति में कहाँ और किससे/किनसे चूक हुई है?

विकास दुबे के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में लगभग ६० एफ०आइ०आर० दर्ज़ हैं। वह अभी तक बड़ी संख्या में पुलिस-अधिकारी से लेकर नेताओं और अन्य जन की हत्या कर चुका है।

अब देखना है, पुलिस किस रणनीति के अन्तर्गत अपना यह चुनौतीपूर्ण अभियान संचालित करती है और उत्तरप्रदेश-शासन की क्या भूमिका रहती है?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ जुलाई, २०२० ईसवी)