★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२ फ़रवरी) राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद लोकसभा मे जिस प्रकार से हिन्दी-अँगरेज़ी मे अपनी विद्वत्तापूर्ण तार्किक प्रतिक्रिया की है, वह सुनने-लायक़ था। राष्ट्रपति अपने अभिभाषण मे बार-बार ‘मेरी सरकार’ का प्रयोग करते रहे, जबकि राष्ट्रपति भूल चुके थे कि सरकार उनकी निजी संस्था नहीं है; राष्ट्रपति को ‘हमारी सरकार’ कहना चाहिए था। राष्ट्रपति का अभिभाषण सुनकर लग रहा था, मानो उनका भाषण भारतीय जनता पार्टी की ओर से लिखकर दिया गया हो, जिसे वे सुनाकर स्वयं मन्त्रमुग्ध हो रहे हों। उनके अभिभाषण मे ‘बेरोज़गारी’ का कहीं कोई उल्लेख नहीं था, जबकि गत वर्ष हमारे ३ करोड़ युवाओं को रोज़गार से हाथ धोना पड़ा था। राहुल ने सुस्पष्ट शब्दों मे कहा था– राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण मे हमारे युवावर्ग की बेरोज़गारी पर एक शब्द नहीं कहा, जबकि ५० साल मे सबसे ज़्यादा रोज़गार आज हिन्दुस्तान मे है। भारत अपने अन्दरूनी कलह के कारण इतना कमज़ोर हो गया है कि वह दुनिया मे अलग-थलग पड़ चुका है। देश मे दो हिन्दुस्तान बन रहा है :– एक, ग़रीबों का हिन्दुस्तान और दूसरा, अमीरों का हिन्दुस्तान। मोदी-सरकार की ग़लत विदेशी नीतियों के कारण आज चीन-पाकिस्तान एक हो चुके हैं, जिसका श्रेय बी० जे० पी० को जाता है। मोदी-सरकार भारत मे लाठी के बल पर शासन करना चाहती है, जो यहाँ चलनेवाला नहीं है। चीन के संदर्भ मे भारत का कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं है, जबकि चीन की सुस्पष्ट योजना है।
पिछले सात वर्षों से जिस तरह से नरेन्द्र मोदी बिना इतिहास को समझे हुए, अर्थहीन बातें करते हुए “रँगे हाथों” पकड़े जाते रहे हैं, उसका उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, राहुल ने दो टूक कहा, “सरकार को इतिहास की जानकारी नहीं।”
‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ ने जिस तरह से देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित लोग की जासूसी ‘पेगासस’ उपकरण से करायी थी और उसके विरुद्ध उसकी दहाड़ देश-देशान्तर मे सुनायी दी थी, उसे विन्दुश: राहुल गांधी ने सदन मे प्रस्तुत किया था। राहुल गांधी ने लोकसभा-स्पीकर ओम बिड़ला को सम्बोधित करते हुए, पेगासस को लोकतन्त्र को नष्ट करनेवाला उपकरण बताया था।
कथित मोदी-सरकार सत्ता सँभालने से अब तक ‘न्यू इण्डिया’, ‘राष्ट्रवाद’ तथा ‘हिन्दुत्व’ के नाम पर जिस तरह से छलावा करती आ रही है, उसका रहस्योद्घाटन राहुल ने ‘द्वि राष्ट्र-सिद्धान्त’ (टु नेशन थ्योरी) को सामने लाते हुए किया था। उन्होंने ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ के राष्ट्रवाद के संदर्भ मे टिप्पणी करते हुए, सदन मे बैठे हुए भक्तों की बन्द आँखें खोल दी थीं। मोदी-सरकार संवैधानिक संस्थाओं का जिस निर्ममता के साथ दोहन करती आ रही है और वे संस्थाएँ जिस प्रकार से नतमस्तक दिख रही हैं, उन पर तार्किक प्रहार करते हुए, राहुल ने न्यायपालिका और चुनाव आयोग के कर्त्तव्य के सम्मुख आधारपूर्ण प्रश्न खड़े किये थे। उन्होंने मोदी-सरकार की ग़लत नीतियों को उजागर करते हुए, लोकहित मे कैसे नीति बनायी और क्रियान्वित की जाती है, इस पर बहुविध प्रकाश डाला था। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया का सार-संक्षेप था– देश आज ख़तरे मे है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ फ़रवरी, २०२२ ईसवी।)