शासन एवं जिलाधिकारी के आदेश को ढ़ेंगा दिखा रहे नगर पंचायत के जिम्मेदार

आपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं से वंचित अझुवा का उच्च प्राथमिक विद्यालय प्रथम

अझुवा/कौशांबी : योगी सरकार की परिषदीय स्कूलों मे बुनियादी सुविधाओं का विकास कर उन्हे प्राइवेट स्कूलों की भांति उच्चीकृत करने की मंशा को जब उनके अधिकारी ही पलीता लगाने पर आमादा हों तो व्यवस्थाओं मे सुधार कैसे हो यह बड़ा प्रश्न समाज मे देखने को मिल रहा है।

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इसकी बानगी अझुवा का उच्च प्राथमिक विद्यालय प्रथम है जिसे शिक्षण के लिए सरकार ने उच्चीकृत कर कक्षा पांच तक इंग्लिश मीडियम भी किया था और इस विद्यालय मे बुनियादी सुविधाओं को उच्चीकृत करने का भी निर्णय सरकार ने ‘आपरेशन कायाकल्प’ के द्वारा किया था। इस संदर्भ मे उ. प्र. शासन के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने 01 जुलाई 2020 को प्रदेश के सभी अधिशासी अधिकारियों सहित निदेशक नगरीय निकाय निदेशालय को कार्ययोजना मे तय बिंदुओं पर कार्य कराकर योगी सरकार की महात्वाकांक्षी योजना ‘आपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत कराए जाने का आदेश जारी किया।

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प्रत्येक परिषदीय स्कूल के लिए लाखों रुपये की इस योजना से विद्यालय मे बुनियादी सुविधाओं का विकास कर उन्हे उच्चीकृत किया जाना था। इसके अनुपालन मे कौशांबी जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी ने भी दिनांक 13 जुलाई 2020 को जिले की सभी निकायों के अधिशाषी अधिकारियों को पत्र जारी कर योजना मे शामिल 12 बिंदुओं से संतृप्त कराने हेतु केन्द्रीय वित्त आयोग, स्मार्ट सिटी फंड, निकाय/निगम निधि तथा अवस्थापना विकास निधि आदि फंडों से धन का उपयोग सरकारी गाइडलाइन के अनुसार करते हुए दिनांक 30 सितंबर 2020 तक कार्य पूर्ण कराए जाने का आदेश दिया बावजूद इसके सरकार की इस महात्वाकांक्षी योजना को अझुवा के जिम्मेदारों ने ठंडे बस्ते मे डाल दिया।

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जब इस संबंध मे क्या कार्य कराए गए इसकी जानकारी संबंधित विद्यालय से पत्र के माध्यम से उच्चाधिकारियों ने मांगी तब जाकर विद्यालय के स्टाफ को जानकारी हुई कि उनके विद्यालय को भी आपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत शामिल कर चमकाने का निर्णय शासन ने लिया था और उन्होने कार्ययोजना की मांग उच्चाधिकारियों से की तब मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद शासन और जिलाधिकारी के पत्र का हवाला देकर नगर पंचायत से कार्ययोजना को पूरा कराए जाने की मांग की जाने लगी तो पहले धनाभाव कहकर मामला टरकाया जाता रहा। फिर बार-बार जिम्मेदारों को इस संबंध मे चेताए जाने पर विद्यालय के खराब हैंडपंपों का हवाला देते हुए बच्चों की पेयजल की समस्या के लिए कहा जाता रहा, तब जाकर विद्यालय मे नया बोर करके सबमर्सिबल पंप लगवाया गया। इसी प्रकार विद्यालय मे शौचालय के लिए करीब साल भर पहले गढ्ढा खोदवाया गया, जिस पर साल भर से आगे कोई काम अभी तक नही हुआ और गढ्ढा वैसे ही खोदा पड़ा है। इसके अतिरिक्त योजना मे शामिल कई बिंदुओं पर कोई कार्य अब तक नही हुआ हालाकि विद्यालय मे चहारदीवारी एवं गेट पहले से लगा हुआ है।

कार्ययोजना मे जिम्मेदार लोगों द्वारा जो शिथिलता देखने को मिल रही है उसके अनुसार सभी बिंदुओं पर काम कब शुरु कराकर उन्हे संपन्न कराया जाएगा, यह सवालों के घेरे मे है। इसके अतिरिक्त विद्यालय मे नियमित साफ-सफाई कराने के लिए जिलाधिकारी ने संबंधित निकाय को लिखित रूप से आदेशित कर रखा है। बावुजूद इसके विद्यालय परिसर मे गंदगी, पत्तियां और झाड़ियां पसरी रहती है। जब विद्यालय परिसर मे बहुत अधिक गंदगी और कचरा जमा हो जाता है और स्टाफ संबंधित अधिकारी से बार-बार जाकर साफ-सफाई कराने का निवेदन करते हैं, तब जाकर कभी-कभार न.पं. के सफाई कर्मियों को भेजकर कभी-कभार विद्यालय परिसर की सफाई करवाई जाती है।

नगर के लोगों ने सरकार एवं जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए लापरवाह अधिकारी पर कार्यवाही करते हुए अतिशीघ्र योजना के अनुरूप कार्यों को संपन्न कराने की मांग की है।